facebookmetapixel
Advertisement
सरकार लाई नया Tax Amendment Bill, गिफ्ट सिटी, विदेशी निवेश कोष और डेटा सेंटर को मिलेंगी टैक्स में छूटManufacturing PMI जुलाई में पांच साल के निचले स्तर पर, कमजोर मांग और बिक्री से सुस्त पड़ा विनिर्माण क्षेत्रFCNR(B) जमा बढ़ने से बैंकों की CD पर निर्भरता घटी, जुलाई में 95 हजार करोड़ रुपये जुटाएकांग्रेस ने मुझे रोका नहीं होता तो मैं भारत का मूल सुधारक होता, 1991 के बजट भाषण में मेरे बजट के कई अंश: यशवंत सिन्हासड़क हादसे रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम, नए दोपहिया और चारपहिया वाहनों में V2V सिस्टम होगा जरूरीटैक्स दबाव के बाद आईटीसी में सुधार के संकेत, शेयर 4% चढ़कर पहुंचा ₹292.50छात्र प्रदर्शन मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना रुख किया साफ, गंभीर अपराध छोड़ बाकी छात्रों को मिलेगी राहतउपचुनाव में भाजपा को बड़ा झटका, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत, दतिया भी नहीं जीत सकी BJPअल-नीनो और कमजोर मॉनसून के बीच पानी पर बढ़ी सियासत, कावेरी से महानदी तक फिर गरमाए राज्यों के विवादक्लोजिंग ऑक्शन से बाजार हैरान, सेंसेक्स 544 अंक चढ़ा तो निफ्टी में 391 अंकों की बढ़त

Go First: पट्टादाताओं के अनुरोध ठंडे बस्ते में

Advertisement
Last Updated- May 30, 2023 | 10:20 PM IST
Go First

भारत के विमानन नियामक ने गो फर्स्ट (Go First) से अपने अपने विमान वापस पाने के लिए पट्टादाताओं द्वारा भेजे गए अनुरोधों को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

नियामक ने न्यायालय को दी जानकारी में कहा कि इसकी वजह यह है कि बंद हो चुकी इस एयरलाइन की दिवालियापन प्रक्रिया के कारण उसकी परिसंपत्तियां ‘फ्रीज’ कर दी गई हैं, जिससे ऐसे अनुरोधों को रद्द कर दिया गया है।

गो फर्स्ट के पट्टादाताओं को भुगतान नहीं मिलने से अपने विमान वापस लेने के लिए इस एयरलाइन से बातचीत करने के अलावा भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के साथ अनुरोध करने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। डीजीसीए को पट्टादाताओं से इस संबंध में करीब 40 अनुरोध मिले हैं।

गो फर्स्ट को 10 मई को दिवालियापन प्रक्रिया के तहत शामिल किया गया था। पट्टादाताओं का कहना है कि विमानों पर उनका अधिकार नहीं है, क्योंकि पट्टा सौदे लीजिंग कंपनियों द्वारा समाप्त कर दिए गए थे, लेकिन भारत सकरार और एयरलाइन इस संबंध में असहमत हैं और उनका कहना है कि दिवालियापन कानून के तहत विमानों को फ्रीज कर दिया गया है।

29 मई को अदालत की दी जानकारी में डीजीसीए ने स्पष्ट किया कि परिसंपत्तियां फ्रीज होने की वजह से सभी अनुरोधों को स्थगित करने के अलावा उनके पास और कोई विकल्प नहीं रह गया है।

हालांकि डीजीसीए ने पट्टादाताओं के अनुरोध ठुकराए नहीं हैं बल्कि उन्हें दिवालिया प्रक्रिया से जुड़ी अवधि तक स्थगित कर दिया है।

Advertisement
First Published - May 30, 2023 | 10:20 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement