सरकारी गैस कंपनी गेल (इंडिया) मध्य प्रदेश के सीहोर में एक बड़ा कारखाना लगाने वाली है। इस कारखाने में सालाना 1.5 मिलियन टन इथेन को क्रैक करके एथिलीन बनाया जाएगा, जिसका इस्तेमाल प्लास्टिक, गोंद, रबर और दूसरी चीजें बनाने में होता है। इस कारखाने पर कंपनी लगभग 50,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
यह गैस कंपनी द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। भारत में प्लास्टिक आदि की मांग लगातार बढ़ रही है और 2040 तक तीन गुना होने का अनुमान है। इसी मांग को पूरा करने के लिए यह कारखाना लगाया जा रहा है।
अभी भारत में सिर्फ रिलायंस इंडस्ट्रीज ही विदेशों से इथेन का आयात करती है, वो भी अपने गुजरात और महाराष्ट्र के कारखानों के लिए। ये हर साल करीब 1.5 मिलियन टन इथेन मंगवाती है। इसी राह पर चलते हुए, सरकारी गैस कंपनी गेल मध्य प्रदेश में एक विशाल इथेन क्रैकिंग यूनिट लगा रही है।
ये यूनिट सालाना 1.5 मिलियन टन इथेन को प्रोसेस कर प्लास्टिक बनाने में इस्तेमाल होने वाला एथिलीन तैयार करेगी। गौरतलब है कि ये नया कारखाना गेल के उत्तर प्रदेश वाले पुराने कारखाने से दोगुना बड़ा होगा और इसे बनने में 5-6 साल का समय लगने का अनुमान है।
पहले प्लास्टिक बनाने वाली कंपनियां नाफ्था नाम के पदार्थ को कच्चा माल के रूप में इस्तेमाल करती थीं, लेकिन अब इथेन ज्यादा चलन में आ गया है। इसकी वजह ये है कि इथेन से 80% तक एथिलीन मिल जाता है, जबकि नाफ्था से सिर्फ 30% ही मिल पाता है।
यही कारण है कि ज्यादातर कंपनियां अब नाफ्था की जगह इथेन का इस्तेमाल करना चाहती हैं। गौरतलब है कि गेल ने पहले महाराष्ट्र में इस कारखाने को लगाने का विचार किया था, लेकिन बाद में उसने मध्य प्रदेश को चुना। उल्लेखनीय है कि भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन भी मध्य प्रदेश में ही एक ऐसा ही कारखाना लगाने जा रही है, जहां वो इथेन का उपयोग करेगी।
गेल (GAIL) कंपनी ने विजयपुर से औरैया तक लगभग 1,792 करोड़ रुपये की लागत से एक नई पाइपलाइन बनाने की योजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना को 32 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह पाइपलाइन कंपनी के पाता पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स में कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने, प्लास्टिक उत्पादन को बढ़ाने और साथ ही साथ ऊर्जा की खपत और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगी।