जिंसों के दामों में लगातार इजाफे के बाद वाहन और उपभोक्ता उपकरणों का विनिर्माण करने वाली फर्मों को लागत दबाव में राहत की उम्मीद नजर आ रही है, क्योंकि इस्पात, एल्युमीनियम, तांबे, प्लास्टिक और कुछ कीमती धातुओं सहित प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में नरमी के संकेत दिख रहे हैं।
हालांकि मुद्रास्फीति के रुख पर नजर रखी जा रही है। विश्लेषकों का कहना है कि चूंकि विनिर्माताओं द्वारा की गई कीमतों में बढ़ोतरी से लागत काबढ़ता दबाव कम होने लगा है, इसलिए चालू तिमाही के दौरान कंपनियों के मार्जिन में विस्तार होने की उम्मीद है।
क्रिसिल रिसर्च के निदेशक हेमल ठक्कर ने कहा ‘जिंसों की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है, लेकिन पिछले एक साल में जितनी तेज बढ़ोतरी नजर आई है, वैसी बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। ज्यादातर वाहन कंपनियों द्वारा दाम बढ़ोतरी की जाने से अब मार्जिन में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में एल्युमीनियम, इस्पात, तांबे और अन्य जिंसों की कीमतों में 25 से 75 प्रतिशत तक की तेजी आई है।
पिछले सप्ताह मारुति सुजूकी इंडिया ने कहा था कि तीसरी तिमाही में कीमती धातुओं के दामों में गिरावट आई है और चौथी तिमाही में भी इस्पात के दामों में कमी की उम्मीद है। कंपनी ने कहा कि इसके साथ-साथ कीमतों में बढ़ोतरी से सकल मार्जिन में मदद मिलेगी। कार बाजार की इस अग्रणी कंपनी के प्रबंधन का कहना है कि कच्चे माल के दाम स्थिर रहने की उम्मीद है। कच्चे माल की औसत कीमतों में पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
तिमाही के दौरान मारुति सुजूकी के सकल मार्जिन में तिमाही आधार पर 50 आधार अंकों का सुधार हुआ, क्योंकि कीमतों में बढ़ोतरी और कम छूट से कच्चे माल के क्रमिक दबाव की भरपाई हुई है।
हॉट रोल्ड कॉइल (एचआरसी) इस्पात, प्लैटिनम और प्राकृतिक रबर (देशी) की कीमतों में नरमी आई है, हालांकि इनके दाम अब भी अधिक स्तर पर बने हुए हैं। उदाहरण के लिए एचआरसी की मौजूदा कीमतें कैलेंडर वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में 68,350 रुपये प्रति टन के मुकाबले 65,000 से 66,000 रुपये प्रति टन के स्तर पर हैं।
इसी तरह प्लैटिनम की कीमतों में तिमाही आधार पर नरमी देखी गई है। यह एक ऐसी कीमती धातु है, वाहन कंपनियों की ओर से बीएस-6 उत्सर्जन मानदंडों की ओर जाने के बाद से जिसकी मांग में वृद्धि देखी है। इसकी मौजूदा कीमत प्रति ग्राम 32.5 डॉलर से लेकर 33 डॉलर बैठती है, जो कैलेंडर वर्ष 2021 की दूसरी तिमाही के प्रति ग्राम 38.1 डॉलर के शीर्ष स्तर से कम है।
बजाज ऑटो ने भी इस बात का संकेत दिया है कि लागत का दबाव कुछ हद तक कम हुआ है। हालांकि इसे चालू तिमाही में कुछ इजाफे के आसार नजर आ रहे हैं, लेकिन यह बहुत अधिक गंभीर नहीं होने वाला है। कार विनिर्माताओं की तरह दोपहिया वाहन विनिर्माता भी लगातार दाम बढ़ोतरी कर रहे हैं।
इस बीच केवल कार और दोपहिया वाहन विनिर्माताओं ने ही दामों में इजाफा नहीं किया है।