स्वीडन की वॉल्वो बस कॉरपोरेशन की भारतीय इकाई वॉल्वो बसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (वीबीआईपीएल) ने कहा कि मंदी से अगले वित्त वर्ष में कंपनी के बस उत्पादन की वृद्धि दर प्रभावित होगी।
वीबीआईपीएल के प्रबंध निदेशक आकाश पस्सी के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष में बस उत्पादकों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। निजी बस संचालकों के कोष फिलहाल खाली हो चुके हैं।
पस्सी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ”पिछले दो साल में भारत में हमारे कारोबार ने काफी अच्छी तरक्की की। 2008 की शुरुआत में हमने बसों की बॉडी बनाने का प्लांट भी शुरू किया। पिछले साल हमारी बिक्री दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ गई। लेकिन 2008-09 में हालत अच्छी नहीं है। लोन सुविधा न मिलने और ऊंची ब्याज दर के चलते बिक्री में 25 फीसदी की कमी का अनुमान है।
फिलहाल 2009 में उम्मीद है कि हमारी बिक्री 20 फीसदी बढ़ेगी।” उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2007-08 में 12 टन या इससे अधिक वजन वाली बसों की कुल बिक्री 33,000 रही। मौजूदा वित्त वर्ष में इसमें 25 फीसदी की कमी होने का अनुमान वॉल्वो ने जताया है।
वॉल्वो ने 2007 की तुलना में 2008 में 2.25 गुनी तरक्की करते हुए 450 बसों की बिक्री की। हालांकि 2009 में इसकी बिक्री 20 फीसदी से अधिक बढ़ने की उम्मीद नहीं है।