प्रमुख औषधि कंपनी बायोकॉन को उसकी नई बायोलॉजिक दवा इटोलिजुमैब का इस्तेमाल भारत में कोविड-19 से हल्के एवं गंभीर रूप से संक्रमित रोगियों के उपचार में करने के लिए भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) से मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही उसके साझेदार इक्विलियम अमेरिका में इस दवा का क्लीनिकल परीक्षण करने की योजना बना रही है। ऐसे में इस दवा की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
अमेरिका में कोविड-19 से संक्रमित रोगियों की संख्या 30 लाख से अधिक है जबकि वहां अब तक करीब 1,32,000 रोगियों की इससे मौत हो चुकी है।
भारत में कोविड-19 के सक्रिय रोगियों की संख्या 2,80,000 से अधिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कोविड संक्रमण के 80 फीसदी मामले हल्के हैं, करीब 15 फीसदी मामलों में रोगियों को ऑक्सीजन की जरूरत होती है और 5 फीसदी मामले गंभीर श्रेणी में आते हैं जिसके लिए वेंटीलेटर की आवश्यकता होती है।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के आकलन के अनुसार, ‘इस आकलन के लिहाज से इटोलिजुमैब के लिए रोगियों की संख्या 42,000 से 56,000 के दायरे में हो सकती है। इस प्रकार इस दवा के लिए बाजार का आकार करीब 39 करोड़ रुपये का हो सकता है जिसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार शामिल नहीं है।’
बायोकॉन और इक्विलियम ने पिछले साल इटोलिजुमैब के लिए विशेष लाइसेंसिंग समझौते का विस्तार किया थाा जिसमें ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भी शामिल हैं। इक्विलियम को मूल रूप से अमेरिका और कनाडा में इस नई जैविक दवा के विकास एवं वाणिज्य के लिए 2017 में विशेष अधिकार दिए गए थे।
बायोकॉन के कार्यकारी चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ ने कहा कि इस दवा के लिए दुनिया के शेष हिस्सों से भी पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि बायोकॉन के पास फिलहाल इतनी क्षमता है कि वह भारत में मौजूदा रोगियों की मांग को पूरी कर सके। उन्होंने कहा, ‘लेकिन हमने महसूस किया कि यह न केवल भारत बल्कि दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती है और इसलिए हम अपनी क्षमता तेजी से बढ़ाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हम पहले भारतीय रोगियों के लिए और उसके बाद वैश्विक स्तर पर इसे उपलब्ध करा सकें।’
भारत में इटोलिजुमैब को अलजुमैब ब्रांड के तहत उतारा गया है। इसकी कीमत 8,000 रुपये प्रति शीशी रखी गई है और रोगियों को आमतौर पर चार शीशी की जरूरत होती है। इस प्रकार रोगी को इसके जरिये उपचार के लिए करीब 32 हजार रुपये खर्च करने पड़ेंगे। हालांकि कुछ मामलों में रोगियों को दो शीशियों की अतिरिक्त जरूरत भी हो सकती है।