रियल्टी का बाजार बुरे दौर से गुजर रहा है, इसमें कोई दोराय नहीं। 2009 में इस क्षेत्र में कई बदलाव होंगे, जो अच्छे भी होंगे और बुरे भी होंगे।
सबसे पहली बात तो यह है कि रियल एस्टेट बाजार की तेजी को भुनाने वाली कंपनियों के दिन अब लद गए हैं। ऐसी कई कंपनियां थीं, जो आसमान पर पहुंचती कीमतों को देखकर इस कारोबार में उतर आई थीं, उन्हें अब दिक्कत होगी और उनमें से कई बाहर हो जाएंगी।
दूसरी बड़ी बात, परियोजनाओं में बदलाव की शक्ल में सामने आएगी। इसी साल दिखने लगा है कि ज्यादातर रियल्टी कंपनियां कम कीमत वाली परियोजनाएं ला रही हैं। अगली साल परियोजनाओं की कीमत और भी कम होगी और कंपनियों का ध्यान निम्न से लेकर मध्यम आयवर्ग के ग्राहकों पर रहेगा।
इसके अलावा कंपनियां मार्जिन बरकरार रखने के लिए भारी मात्रा में मकान बनाएंगी। जाहिर है, खरीदारों के लिए मकान खरीदना आसान होगा। मकानों की कीमतें भी 2009 में बिल्कुल वाजिब रहेंगी।रियल्टी कंपनियों में कारोबारी प्रणाली भी बहुत सुधरेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
दरअसल बैंकों के नियम सख्त हो गए हैं और अब उन्हीं कंपनियों को नकदी मिलेगी, जिनका काम करने का ढंग बेहतरीन होगा। इससे बाजार की हालत सुधरने में भी मदद मिलेगी और ग्राहकों को भी आसानी होगी। अब चुनिंदा कंपनियां इस कारोबार में अच्छा काम करेंगी और प्रशासन के मामले में वे काफी उम्दा होंगी।
बुरे दौर में छोटे खिलाड़ियों की जान पर बन आती है। रियल्टी के लिए दौर अच्छा नहीं है, इसलिए छोटी कंपनियां गायब हो सकती हैं। इसके अलावा विलय-अधिग्रहण की गतिविधियां भी इस क्षेत्र में दिखने की पूरी संभावना है।
जहां तक रोजगार का सवाल है, तो हरेक क्षेत्र पर मंदी की मार पड़ रही है। रियल्टी भी इससे अछूता नहीं है। यहां भी छंटनी होने की संभावना है और वेतन में बढ़ोतरी की उम्मीद कम ही रखनी चाहिए।र् नई नियुक्तियां शायद ही होंगी।
(बातचीत : ऋषभ कृष्ण)
खपत में कमी नहीं होगी और गांवों से कारोबार में इजाफे की उम्मीद है
राजीव सिंह
उपाध्यक्ष,
डीएलएफ
मंदी कहां है, हमारा बाजार तो 2009 में पहले से तेज बढ़ेगा
सुनील जिंदल
सीईओ, एसवीपी समूह