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मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स से भारत में कारोबार बढ़ाएगी डीपी वर्ल्ड

डीपी वर्ल्ड भारत में मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स और मूल्यवर्धित आपूर्ति समाधान के जरिए अपने कारोबार और निवेश को और विस्तार देने की तैयारी में है।

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प्राची पिसल   
Last Updated- December 27, 2025 | 8:30 AM IST

बहुराष्ट्रीय लॉजिस्टिक कंपनी डीपी वर्ल्ड भारत की व्यापार वृद्धि को लेकर ‘आशावान’ है। इस वजह से वह अपने भारतीय कारोबार को मल्टीमोडल पेशकशों के जरिये आपूर्ति श्रृंखला के अधिक मूल्य वाले समाधानों के साथ और बेहतर तरीके से जोड़ने का लक्ष्य बना रही है।

डीपी वर्ल्ड के कंट्री मैनेजर (इंडिया सबकॉन्टिनेंट) हेमंत कुमार रुइया ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘अगले कुछ साल के दौरान हम भारत का अपना कारोबार और बेहतर तरीके से जुड़ने तथा आपूर्ति श्रृंखला के अधिक मूल्य वाले समाधानों की दिशा में बढ़ते हुए देख रहे हैं। चूंकि वैश्विक व्यापार में भारत की भूमिका लगातर बढ़ रही है, इसलिए ग्राहकों के लिए पूर्वानुमान लगाने की अधिक क्षमता, लचीलापन और सरलता पर ध्यान रहेगा।’ रूइया के अनुसार भारत में डीपी वर्ल्ड को उसके संयुक्त और परिसंपत्तियों की अगुआई वाले मोडल को बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने तथा कारखानों से लेकर ग्राहकों के घर तक शुरू से आखिर तक की लॉजिस्टिक क्षमताओं को दिखाने का मौका मिला हुआ है।

दुबई का यह समूह पहले ही भारत में लगभग 3 अरब डॉलर का निवेश कर चुका है और भविष्य के विस्तार के लिए 5 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है। डीपी वर्ल्ड भारत में अपनी अवसरंचना की मालिक है और उसका परिचालन करती है, जिससे परिचालन पर बेहतर नियंत्रण, सेवा का पूर्वानुमान लगाने की क्षमता और ग्राहकों के लिए संयोजित पेशकश संभव होती है। फिलहाल कंपनी के पास भारत में 5 बंदरगाहों पर टर्मिनल हैं और वह उनका संचालन करती है तथा छठा टर्मिनल निर्माणाधीन है।

बंदरगाहों के अलावा कंपनी भारतीय रेलवे नेटवर्क पर 90 से ज्यादा रिग्स के साथ रेल कारोबार भी चलाती है और उसके पास लगभग 16,000 कंटेनर हैं तथा उसने पूरे देश में 50 लाख वर्ग फुट से ज्यादा वेयरहाउसिंग क्षेत्र विकसित किया है। इसके पोर्टफोलियो में कोल्ड चेन इकाइयां, फ्रेट फॉरवर्डिंग, एक्सप्रेस स्मॉल-पार्सल लॉजिस्टिक और बंदरगाहों के बाहर कंटेनर फ्रेट स्टेशन भी शामिल हैं। डीपी वर्ल्ड भारत में सबसे बड़ी फ्री ट्रेड जोन (एफटीजेड) परिचालक भी है, जिसकी तीन इकाइयों देश भर में फैली हुई हैं।

(सुधीर पाल सिंह और ध्रुवाक्ष साहा के इनपुट के साथ)

First Published : December 27, 2025 | 8:30 AM IST