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बेपटरी नहीं होगी विनिवेश व निजीकरण योजना

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Last Updated- December 12, 2022 | 5:17 AM IST

वैश्विक महामारी की इस दूसरी लहर से शायद सरकार का निजीकरण अभियान और रणनीतिक विनिवेश बेपटरी न हो, क्योंकि कोविड के मामलों में तेज उछाल के बीच उन्हें देश की वृहद आर्थिक स्थिति के संबंध में महत्त्वपूर्ण उपकरण के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार के सूत्रों ने कहा कि बीईएमएल, बीपीसीएल, शिपिंग कॉर्पोरेशन और एयर इंडिया सहित कुछ प्रमुख हिस्सेदारी बिक्री के लिए तय की गई इस प्रक्रिया की समयसीमा में अभी तक कोई संशोधन नहीं किया गया है। इसके अलावा वे इस वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 22) में इन हिस्सेदारी बिक्री से संबंधित लेनदेन पूरा करने के लिए भी आश्वस्त हैं। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य का तय किया है।
इस संबंध में जानकारी रखने वाले सरकार के एक सूत्र ने कहा कि वर्तमान राजकोषीय क्षेत्र और देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को देखते हुए निजीकरण और परिसंपत्ति विमुद्रीकरण दोनों ही ध्यान केंद्रित किए जाने वाले क्षेत्र बने हुए हैं। सूत्र के अनुसार इस वैश्विक महामारी से कम से कम घाटे में चल रहे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के हालात नहीं बदलेंगे और न ही केंद्र ऐसी कंपनियों के लिए बहुत अधिक मूल्यांकन का अनुमान लगा रहा है। इसलिए बाजार की मौजूदा स्थिति की गणना नहीं की जा सकती है, जबकि कुछ निवेशकों ने इनमें रुचि दिखाई है।
इस महीने की शुरुआत में नीति आयोग, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाओं और आर्थिक मामलों के विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने निजीकरण के लिए संभावित उम्मीदवारों पर चर्चा करने के लिए बैठक की थी। एक सूत्र ने कहा कि इस वित्त वर्ष में समयसीमा पाने और इस प्रक्रिया में तेजी से काम करने के लिए इस तरह की कई बैठकों की आवश्यक है। ऐसी खबर है कि पहले चरण में सरकार कम से कम दो पीएसयू बैंकों और एक सामान्य बीमा कंपनी चुन सकती है। इसके अलावा शेष संभावित उम्मीदवारों के लिए योजना तैयार की जा रही है। हालांकि इस सूची में उन नामों को शामिल नहीं किए जाने की संभावना है, जिनका पिछले कुछ सालों में विलय या एकीकरण किया गया था। इनमें शामिल हैं – पंजाब नैशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, इंडियन बैंक और यूनियन बैंक। लेकिन वे भारतीय ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब ऐंड सिंध बैंक में से अंतिम फैसला कर सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि प्रस्तावित लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन की हिस्सेदारी बिक्री के मामले की तरह ही बैंकों के निजीकरण के लिए भी कुछ अन्य मुख्य कार्यों के साथ-साथ कुछ संशोधनों की आवश्यकता है। सूत्र ने कहा कि हम सोच-विचार कर रहे हैं और इस पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं तथा उम्मीद है कि समयबद्ध तरीके से इसे कर लेंगे।
हालांकि वर्ष 2020 में प्रकोप की वजह से हुए लॉकडाउन के कारण शिपिंग कॉर्पोरेशन सहित इनमें से बहुत सारी रणनीतिक बिक्री अटक गई थी। सिंगापुर और हॉन्ग कॉन्ग के निवेशकों ने आभासी बैठकों के कई दौर आयोजित किए थे, लेकिन इसके बावजूद यह अपेक्षित रूप से नहीं हो सका। अलबत्ता कॉर्पोरेशन विनिवेश के दूसरे चरण में है और उसे बिक्री के लिए कई बोलियां मिली हैं। सूत्रों ने यह भी कहा कि सरकार का इरादा अपने नियंत्रण में चार से पांच बैंकों को रखने का है, जो क्षेत्रों और राज्यों पर निर्भर करेंगें तथा शेष बैंकोंं का चरणबद्ध तरीके से निजीकरण किया जाएगा।

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First Published - April 30, 2021 | 11:50 PM IST

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