पीरामल समूह की तरफ से दीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉरपोरेशन (डीएचएफएल) का अधिग्रहण अगले वित्त वर्ष में पूरा होने की संभावना है क्योंकि लेनदारों का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया में समय लग रहा है। इसके साथ ही मार्च तिमाही में देश के सबसे बड़े डिफॉल्ट (90,000 करोड़ रुपये) में से एक के समाधान की उम्मीद कर रहे लेनदारों को लंबा इंतजार करना होगा।
इस महीने कंपनी ने एनसीएलटी में अतिरिक्त शपथपत्र दाखिल किया था और इसके जरिए अदालत को सूचित किया कि कपिल वधावन की अगुआई वाले पिछले प्रबंधन की तरफ से दिए गए कर्ज के कारण अतिरिक्त मौद्रिक नुकसान होगा।
कंपनी ने कहा कि आरबीआई की तरफ से नियुक्त प्रशासक के साथ साझा की गई ऑडिटर की रिपोर्ट के मुताबिक, इन लेनदेनों का मौद्रिक प्रभाव 1,264.29 करोड़ रुपये है, जो बकाया मूलधन, 130 करोड़ रुपये का अर्जित ब्याज और कम ब्याज वसूलने के कारण 29.94 करोड़ रुपये का नुकसान शामिल है। यह ग्रांट थॉनर्टन की तरफ से खोजे गए 15,000 करोड़ रुपये की क्षति के अतिरिक्त है, जो पहले फॉरेंसिक ऑडिटर थी।
पीरामल के अधिकारियों को अतिरिक्त नुकसान से आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि अतिरिक्त नुकसान के संकेत पहले से ही दिख रहे थे। आंतरिक सूत्रों का कहना है कि वे कर्ज समाधान की तीव्रता के कारण देरी होने की आशंका पहले से ही जता रहे थे। एक लेनदार ने कहा, पीरामल की तरफ से इस साल फरवरी में समाधान योजना पेश की गई थी, जब उसे आरबीआई से अनुमति मिली। इस प्रक्रिया में कम से कम छह महीने लगेंगे। डीएचएफएल के समाधान का न सिर्फ भारतीय लेनदार इंतजार रहे हैं बल्कि अन्य हितधारकों को भी इसकी प्रतीक्षा है। भारतीय बैंकों के अलावा डीएचएफएल के ऊपर प्रॉविडेंट फंड ट्रस्टों, म्युचुअल फंडों, सावधि जमाधारकों और कर्मचारियों का भी बकाया है।
पीरामल की तरफ से सौंपी गई योजना के मुताबिक, डीएचएफएल के लेनदारों को अगले पांच साल में 34,250 करोड़ रुपये मिलेंगे। इसमें से पीरामल ने 14,700 करोड़ रुपये की अग्रिम नकदी की पेशकश की है, जिसमें डीएचएफएल की बैलेंस शीट में मौजूद नकदी शामिल है और बाकी गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र के जरिए दिया जाएगा।
यह अधिग्रहण पीरामल समूह की तरफ से अपनी लोनबुक को विशाखित करने की रणनीति के मुताबिक है और समूह की वित्तीय सेवा व फार्मा कारोबार को भविष्य में अलग करने की रणनीति के मुताबिक भी है। पीरामल समूह के एक अधिकारी ने कहा कि कंपनी की योजना अपने वित्तीय सेवा कारोबार का विलय डीएचएफएल के साथ करने और सभी कर्मचारियों को बनाए रखने की है।