भारतीय बीमा निर्यात एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) बढ़ते फर्जीवाड़े को रोकने के लिए क्रेडिट स्कोर की गणना के लिए बीमा धोखाधड़ी को एक मानदंड के तौर पर शामिल करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।
यह प्रस्ताव आईआरडीएआई और साधारण बीमा परिषद द्वारा गठित कार्यशील समूह की सिफारिशों का हिस्सा है। समूह ने सुझाव दिया है कि व्यक्तियों के जोखिम प्रोफाइल का मूल्यांकन करते समय बीमा धोखाधड़ी को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए और उनके क्रेडिट स्कोर की गणना के लिए उसका सही तरीके से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
खराब क्रेडिट स्कोर का डर लोगों में होगा क्योंकि इससे लोगों को वित्तीय लाभ जैसे कि कर्ज और क्रेडिट कार्ड आदि से वंचित रहना पड़ सकता है, वहीं इससे बीमा धोखाधड़ी के मामलों को कम करने में भी मदद मिलेगी। कार्यकारी समूह ने इसका भी उल्लेख किया कि बेजा लाभ के लिए बीमा कंपनी के साथ धोखाधड़ी के प्रयास को अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ भी दोहराया जा सकता है। ऐसे में इस तरह की गड़बड़ी के खिलाफ समुचित कार्रवाई का भी मामला बनेगा।
बीमा नियामक द्वारा इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है क्योंकि ऐसी धोखाधड़ी से बीमा की लागत बढ़ती है और एक अनुमान के मुताबिक बीमा कंपनियों को सालाना 45,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ता है। कार्यकारी समूह ने कहा कि इस नुकसान की भरपाई के लिए ग्राहकों को ऊंचे प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है। कार्यकारी समूह ने कहा कि देश भर में बीमा की पहुंच बढ़ रही है और सरकार हर नागरिक को बीमा के दायरे में लाने पर जोर दे रही है, ऐसे में धोखाधड़ी और संदिग्ध गतिविधियां बढ़ने की आशंका है और नियामक को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। क्रेडिट सूचना कंपनी (नियमन) अधिनियम, 2005, क्रेडिट सूचना कंपनी नियमन, 2006 और क्रेडिट सूचना कंपनी नियम, 2006 में संशोधन के जरिये इस तरह के बदलाव करने का प्रस्ताव किया गया है।
इसके लिए बीमा कंपनियों को कम से कम एक क्रेडिट सूचना कंपनी का सदस्य बनना होगा। बीमा कंपनियों के साथ ही अन्य क्रेडिट संस्थानों को अपने कर्जदारों तथा बीमा धोखाधड़ी से संबंधित जानकारी या डेटा क्रेडिट सूचना कंपनी को मुहैया करानी होगी। प्रस्तावित संशोधन के तहत ऋण देने वाले संस्थानों और बीमा कंपनियों को मासिक आधार पर ऐसी सूचना की जानकारी देनी होगी और प्रदान की गई जानकारी अद्यतन, सटीक, संपूर्ण और सही होनी चाहिए।
व्यक्तिगत और कंपनियों के मामले में प्रस्तावित संशोधन के तहत क्रेडिट सूचना कंपनी को कर्जदारों के खातों की जानकारी जैसे कि क्रेडिट लिमिट, बकाया राशि, चूक की राशि और अवधि, जमानत के साथ-साथ बीमा धोखाधड़ी से संबंधित विवरण जैसे कि पॉलिसी, प्रीमियम, एजेंट, मध्यस्थ, नुकसान का आकलनकर्ता, या धोखाधड़ी में शामिल व्यक्ति आदि की जानकारी जुटानी होगी।
समिति ने साधारण बीमा के सभी ग्राहकों का केवाईसी पॉलिसी जारी करते समय ही कराने का प्रस्ताव भी किया गया है, जिससे जोखिम प्रोफाइल बनाने और जांच-परख नियम भी सुदृढ़ होंगे। हालांकि केवाईसी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भी लेने की अनुमति दी जानी चाहिए, क्योंकि बीमा उत्पादों की मात्रा और दायरा काफी व्यापक होता है। इसके साथ ही ई-केवाईसी या आधार से जुड़े सत्यापन की प्रक्रिया को भी आसान बनाने की जरूरत है। भारतीय बीमा संस्थान के महासचिव दीपक गोडबोले ने कहा कि पॉलिसी खरीदते समय गलत जानकारी देना और फर्जी तथा बढ़ा-चढ़ाकर दावा करना सामान्य धोखाधड़ी के मामले हैं। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि दुनिया भर में करीब 10 फीसदी प्रीमियम का नुकसान इस तरह की धोखाधड़ी की वजह से होती है। उन्होंने कहा कि क्रेडिट स्कोर की गणना करते समय बीमा धोखाधड़ी को भी मानदंड बनाना सैद्धांतिक तौर पर संभव है। रिस्ककवरी के सह-संस्थापक सुवेंदु पुरुस्ते ने कहा कि विभिन्न तरह की धोखाधड़ी के मामले सामने आने के बाद बीमा कंपनियों ने जांच-परख के मानदंड कड़े कर दिए हैं और प्रस्तावित कदम से कंपनियों को जोखिम आकलन करने में और मदद मिलेगी।