डेलॉयट के 2020 के लिए ग्लोबल ऑटोमोटिव कस्टमर रिसर्च से पता चलता है कि भारत उन कुछ देशों में शामिल है जहां आधुनिक प्रौद्योगिकियों के लिए पैसा खर्च करने का उत्साह अच्छा खासा है। इस सर्वे से पता चला है कि प्रत्येक तीन में से दो भारतीय कनेक्टेड प्रौद्योगिकियों के लिए 50,000 रुपये तक खर्च करने को इच्छुक हैं।
वर्ष 2025 तक भारत में ज्यादातर कारों के उपयोगकर्ताओं के घर और कार्यालयों से जुडऩे की संभावना है। सर्वे के अनुसार ओईएम (मूल उपकरण निर्माताओं) और बीमा कंपनियों (जो व्यक्तिगत बीमा उत्पाद डिजाइन करने के लिए कारों से डेटा इस्तेमाल कर सकती हैं) के बीच भागीदारियां बढऩे की संभावना है। भारत में कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी अभी शुरुआती अवस्था में है और इन्फोटेनमेंट सिस्टम्स और डिजिटल कॉकपिट की महज 5 प्रतिशत पैठ है। कनेक्टिविटी काफी हद तक स्मार्टफोन और इन-कार इन्फोटेनमेंट डिवाइस तक सीमित है।
डेलॉयट में पार्टनर एवं ऑटोमोटिव सेक्टर के दिग्गज राजीव सिंह का मानना है कि कनेक्टेड टेक्नोलॉजी को अपनाने की प्रवृत्ति महामारी प्रभावित इस देश में तेजी से बढऩे की संभावना है। चूंकि लोग ड्राइवर पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं गाड़ी चालाना पसंद करते हैं, इसलिए इस तरह के फीचर्स की लोकप्रियता बढ़ेगी।
सिंह ने कहा, ‘पुराने समय के मुकाबले अब सब कुछ ऑनलाइन से जोडऩे की जरूरत बढ़ी है। यात्रा के लिए ड्राइवर पर निर्भरता काफी हद तक खत्म हो जाएगी।’ सिंह के अनुसार, इस बीच महामारी से व्यवहारगत बदलाव आ रहा है। उन्होंने कहा कि आप नियमित निवारक सेवा के मुकाबले प्रीडिक्टिव मैंटेनेंस को ज्यादा पसंद करेंगे। निर्माता यह महसूस कर रहे हैं कि कोविड के बाद की दुनिया में ग्राहक बार बार वर्कशॉप जाना पसंद नहीं करेंगे। इसलिए कंपनियां प्रीडिक्टिव मैंटेनेंस को संभव बनाने के लिए कार्य कर रही हैं। इससे मालिक को अपने स्मार्टफोन के जरिये सही समय पर कलपुर्जों और एक्सेसरीज की देखरेख करने में मदद मिलेगी।
सिंह ने कहा कि इन फीचर्स से निर्माताओं को बिक्री बढ़ाने में मदद मिलेगी, क्योंकि वे बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी मॉडल पेशकशों को खास बनाने में सफल रहेंगे। भारत में काफी कारों में पहले से ही ये फीचर्स मौजूद हैं। इसके अलावा नए फीचर्स से खरीदारों की दिलचस्पी में भी इजाफा होगा।