अब तक तो मंदी ने कंज्यूमर डयूरेबल सेक्टर की हवा निकाल कर रखी थी। लेकिन अब इस सेक्टर को अपने दिन फिरने की उम्मीद है।
इस उम्मीद के सहारे तो इस सेक्टर की कंपनियां नए उत्पादों को लॉन्च कर रही है और मोटा खर्च करने से भी नहीं संकोच कर रही हैं। असल में, कंपनियां अब लोगों को कम पैसे में ज्यादा देने की कोशिश कर रही हैं। साथ ही, उनकी नजर अब गांवों की तरफ भी है।
एक तरफ तो ज्यादातर कंपनियां जहां घटती मांग की वजह से पूंजीगत विस्तार से दूरी बना रही हैं, वहीं कंज्यूमर डयूरेबल्स उद्योग के लिए खुशी की कई बातें हैं। छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करने के बाद सरकारी कर्मचारियों की सैलरी काफी बढ़ चुकी है।
ऊपर से, ये सिफारिशें जनवरी, 2006 से स्वीकृत गई हैं, तो बकाया रकम के रूप में भी उन्हें काफी मोटी रकम मिली है। इस वजह से उनके हाथों में काफी पैसा आ गया है, जिसका इस्तेमाल वे कंज्यूमर डयूरेबल उत्पादों को खरीदने में कर रहे हैं।
दूसरी तरफ, मंदी का असर ग्रामीण क्षेत्रों पर ज्यादा नहीं पड़ा है। अच्छे मॉनसून और राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की वजह से ग्रामीण इलाकों में भी लोगों के पास काफी पैसा आ गया है। उद्योग जगत के सूत्रों के मुताबिक इस उम्मीद के पीछे असली वजह यह है कि पिछले साल मंदी के डर से कई लोगों ने अपनी खरीदारी को कुछ समय के लिए टाल दिया था, लेकिन अब वे खरीदारी को तैयार हैं।
इसी लिए तो सैमसंग, विडियोकॉन, गोदरेज कंज्यूमर अप्लाइएंशेज, बजाज इलेक्ट्रिकल्स, एलजी, व्हर्लपूल और पैनासोनिक जैसी कंज्यूमर डयूरेबल्स जगत की कंपनियों ने आक्रमक योजना बना रखी है। ब्रांड कंसल्टेंट हरीश बिजूर का कहना है कि, ‘कंपनियों का जोर खास तौर पर वैसे उत्पादों पर होगा, जिनकी कीमत कम हो और वे ज्यादा काम कर सकें। साथ ही, अब कंपनियां ऑफरों की भी बरसात करेंगी।’
वैसे, सैमसंग की प्रवक्ता ने बताया, ‘हमें उम्मीद है कि हमारे एसी का बाजार 50 फीसदी की रफ्तार से इस साल बढ़ेगा। साथ ही, फ्रिज, वाशिंग मशीनों और माइक्रोवेव जैसे घरेलू उपकरणों के बाजार में 35 फीसदी का इजाफा होगा।’ इसी तरह, विडियोकॉन को भी उम्मीद है कि 2009 की गर्मियां उसके लिए मुनाफे की ठंडी बयार लेकर आएंगी। कंपनी के उपाध्यक्ष (सेल्स ऐंड मार्केटिंग) अमित गुप्ता का कहना है कि, ‘इस साल तो हम एसी बाजार में सात-आठ फीसदी की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 15 फीसदी कर देंगे। साथ ही, इस साल हमने 15-20 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ने का लक्ष्य रखा है।’
इस बीच व्हर्लपूल और बजाज इलेक्ट्रिकल्स को भी गर्मियों में मोटी कमाई की उम्मीद है। व्हर्लपूल इंडिया के महप्रबंधन (ब्रांड मार्केटिंग) सुखप्रीत सिंह का कहना है कि, ‘पिछले साल हमने 20 फीसदी की रफ्तार से तरक्की की थी। इस साल के लिए भी हमारी यही उम्मीद है।’
बजाज इलेक्ट्रिकल्स के कार्यकारी निदेशक आर. रामाकृष्णन का कहना है कि, ‘हमने पिछले पांच सालों में कुल मिलाकर 30 फीसदी की रफ्तार से तरक्की की है। इस साल अगर इसे बढ़ा नहीं सके, तो कम से कम इस कायम तो रखेंगे ही।’
सैमसंग नए लॉन्चों और नए विज्ञापनों के जरिये बाजार में सनसनी पैदा करना चाहती है। वैसे, इस सेक्टर की दूसरी कंपनियां भी तो यही कर रही हैं। नकदी की कमी को ध्यान में रखते हुए विडियोकॉन ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के साथ मिलकर कंज्यूमर लोन मुहैया करवाने का फैसला किया है।