मूल्यांकन घटने, धन जुटाने के चरण सुस्त होने और आईपीओ में देरी होने के बाद अब कर्मचारियों की छंटनी की बारी है। हाल में ऐसा करने वाली कंपनी सॉफ्टबैंक समर्थित कार्स24 है, जो पुराने वाहनों की प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है। मामले की जानकारी रखने वालों ने बताया कि कार्स24 ने 600 कर्मचारी निकाल दिए हैं।
उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद धन जुटाने में मंदी आने और निवेशकों में सतर्कता बढऩे के बीच नकदी बचाना है। इस बारे में जानकारी जुटाने के लिए किए गए फोन का कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया। सूत्रों के मुताबिक छंटनी विभिन्न विभागों और पदों पर हुई है और कंपनी के कुल 9,000 कर्मचारियों में से 6 फीसदी से ज्यादा हटा दिए गए हैं। कार्स24 ने छंटनी की पुष्टि की लेकिन नौकरी से निकाले गए लोगों की संख्या बताने से इनकार कर दिया। कंपनी ने एक बयान में कहा कि यह प्रदर्शन से जुड़ी सामान्य छंटनी है, जो हर साल होती है।
कार्स24 अब वेदांतु, अनअकैडमी और मीशो जैसी उन स्टार्टअप की फेहरिस्त में शामिल हो गई है, जिन्होंने कर्मचारियों की छंटनी की है।
इस सप्ताह शिक्षा तकनीक क्षेत्र की यूनिकॉर्न वेदांतु ने 424 कर्मचारियों यानी अपने कुल कर्मचारियों में से 7 फीसदी को नौकरी से निकाला था। बेंगलूरु की इस कंपनी ने एक ब्लॉग पोस्ट के जरिये यह जानकारी दी थी। विशेषज्ञों के मुताबिक इस कदम को महामारी के बीच शिक्षा तकनीक क्षेत्र में मुनाफे, एकीकरण और लागत में कटौती पर ध्यान देने के रूप में देखा जा रहा है। कंपनी ने इस छंटनी से कुछ दिन पहले ही 200 कर्मचारी निकाले थे, जिनमें ठेके पर रखे कर्मचारियों के साथ पूर्णकालिक कर्मचारी भी शामिल थे।
वेदांतु के सीईओ और सह-संस्थापक वंसी कृष्णा ने कहा कि बाहरी माहौल दिक्कतों भरा है। उन्होंने कहा कि यूरोप में युद्ध, मंदी की चिंता और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ी है, जिस कारण दुनिया भारत में शेयरों में भारी गिरावट आई है। पिछले महीने शिक्षा तकनीक यूनिकॉर्न अनअकैडमी ने करीब 600 कर्मचारियों की छंटनी की थी, जो उसके कुल कर्मचारियों के करीब 10 फीसदी थे। सॉफ्टबैंक समर्थित कंपनी ने पूरे संगठन में स्थायी, अस्थायी कर्मचारियों और शिक्षकों की छंटनी की थी। अनअकैडमी ने मार्च में संगठन में ‘पुनर्गठन’ के बीच अपनी प्रेपलैडर टीम से 100 से अधिक कर्मचारियों को निकाला था।
बैजूज के स्वामित्व वाली शिक्षा तकनीक स्टार्टअप व्हाइटहैट जूनियर के 800 से अधिक कर्मचारी वापस दफ्तर बुलाए जाने के बाद पिछले दो महीनों में इस्तीफा दे चुके हैं। फरवरी में शिक्षा तकनीक स्टार्टअप लिडो ने काम बंद कर दिया था, जिसके बाद कर्मचारियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के जरिये मदद मांगी थी।
असल में कंपनियों के लिए पूंजी की किल्लत बने रहने के आसार हैं। विभिन्न भारतीय कंपनियों को वित्त मुहैया कराने वाले वैश्विक तकनीक निवेशक सॉफ्टबैंक समूह ने इस महीने कहा कि उसे अपनी विजन फंड की इकाई में 26 अरब डॉलर से अधिक का रिकॉर्ड नुकसान हुआ है क्योंकि उसके पोर्टफोलियो का मूल्य घट गया है।
सॉफ्टबैंक के संस्थापक और सीईओ मासायोशी सोन ने कहा कि इस साल कंपनी पिछले साल की तुलना में केवल आधा या एक चौथाई ही निवेश कर सकती है। सॉफ्टबैंक ने साल में 13.12 अरब डॉलर का शुद्ध घाटा दर्ज किया है। सोन ने एक कंपनी वेबकास्ट में कहा, ‘कोई नहीं जानता कि इस तरह के बाजार में कल क्या होगा, इसलिए हमें बुरे दौर के लिए खुद को तैयार करना होगा। हम खुद को बचाव की मुद्रा में लाना और हाथ में नकदी जमा करना चाहते हैं। हम नया पैसा निवेश करते समय ज्यादा सतर्कता बरतेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘हमारे पास बहुत सी कंपनियों से निकासी से काफी धन आया है। दुनिया में उठापटक है। महंगाई दुनिया भर में बढ़ रही है। इससे महंगाई दर बढ़ेगी, जिससे बाजार में शेयर की कीमतें गिरेंगी।’सॉफ्टबैंक की प्रस्तुति से पता चलता है कि भारतीय फिनटेक कंपनी पेटीएम में उसके 1.4 अरब डॉलर के निवेश का उचित मूल्य करीब 80 करोड़ डॉलर है, जिससे संचयी मूल्यांकन में 60 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है। वेदांतु के कृष्णा ने कहा, ‘ऐसे माहौल में आगामी तिमाहियों के दौरान पूंजी की किल्लत रहेगी।’ अमेरिका में सूचीबद्ध तकनीकी शेयरों में गिरावट और हाल में सूचीबद्ध स्टार्टअप के शेयरों पर पड़ी मार से विभिन्न स्टार्टअप की आईपीओ योजनाओं पर विराम लग गया है।