बीएस बातचीत
रूस और यूक्रेन के बीच टकराव की पृष्ठभूमि में पिछले कुछ कारोबारी सत्रों के दौरान बाजारों में खासा उतारचढ़ाव देखने को मिला है। इस तरह के घटनाक्रम से तेल समेत ज्यादातर जिंसों के भाव बढ़े हैं और ब्रेंट 110 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। रोजर्स होल्डिंग्स के चेयरमैन जिम रोजर्स ने पुनीत वाधवा को दिए साक्षात्कार में कहा कि निवेशकों को वैसी परिसंपत्ति खरीदनी चाहिए, जिसके बारे मे वे जानते हों और उसका स्वामित्व हासिल करने में सहज महसूस करे। बातचीत के मुख्य अंश…
हालिया भूराजनीतिक परिस्थितियों को और बाजार ने जिस तरह की प्रतिक्रिया जताई है उसे आप कैसे देखते हैं?
ऐसा देखा गया है कि बाजारों को युद्ध पसंद नहीं है। युद्ध तब शुरू हुआ जब बाजार मजबूत थे और महंगे भी। महंगाई में तेजी आई है और ब्याज दरें भी बढ़त की राह पर है। इन वजहों से बाजार में गिरावट आई। मुझे लगता है कि भूराजनीतिक स्थिति जल्द ही ठीक हो जाएगी और ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी शायद नहीं होगी। इसके परिणामस्वरूप बाजारों में इस साल के दूसरे हिस्से में तेजी आएगी, जो उनकी तेजी का आखिरी दौर हो सकता है।
आप मौजूदा स्तर से कितनी गिरावट की संभावना देख रहे हैं?
इस तरह की घबराहट वाली स्थिति का सामान्य तौर पर मतलब यह है कि निचला स्तर करीब है। मुझे लगता है कि अगले कुछ दिनों में बाजार निचला स्तर छोड़ देगा और फिर काफी तेजी देखने को मिलेगी।
अनिश्चित समय में निवेशकों को क्या करना चाहिए?
लोगों को उनमें निवेश करना चाहिए, जिनकी उन्हें थोड़ी बहुत जानकारी हो। वहीं निवेश बनाए रखें जहां आप सहज महसूस करते हों। मेरे पास चांदी और कृषि जिंस व शेयर हैं और मैं और खरीद सकता हूं। आप जिस परिसंपत्ति वर्ग में निवेश करना चाहते हैं अगर उसकी जानकारी नहींं है तो उससे दूर रहना ही बेहतर होगा।
मौजूदा स्थिति के नियंत्रण में आने तक क्या वैश्विक केंद्रीय बैंक आगे आएंगे और रकम झोंकेंगे?
राष्ट्रपति पुतिन केंद्र में हैं और बाजार उनके कदमों पर प्रतिक्रिया जता रहे हैं। मैं यही कह सकता हूं कि उनके लिए स्थितियां बेहतर नहीं होने जा रही। अगर दुनिया पुतिन को इस स्थिति से बाहर निकालने का रास्ता तलाश लेता है तो सिस्टम मेंं काफी रकम निवेशित होने की प्रतीक्षा में है। शांति, नकदी और केंद्रीय बैंकों की तरफ से ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी न होने से बाजारों मे तेजी आ सकती है। वैश्विक केंद्रीय बैंक अभी ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी नहीं करेंगे क्योंकि वे डरे हुए हैं। महंगाई और बढ़ेगी और इससे बचने का रास्ता नहीं है। अगर आप इसके मुताबिक निवेश करते हैं तो आप कमाई करेंगे। जिंस अभी भी सस्ते नजर आ रहे हैं और इसी वजह से मैंं खरीदारी पर विचार कर रहा हूं।
आप कौन से जिंस और खरीदना चाहते हैं.. सोना, चांदी, तेल, धातु?
मैंने चांदी व सोने में निवेश किया है और गिरावट पर और खरीदूंगा। मैंं किसी और चीजों के मुकाबले कृषि से जुड़े शेयर व कृषि जिंसों की और खरीदारी करूंगा। खरीदारी की फंडामेंटल वजह भी है जो है इलेक्ट्रिक वाहन जो लीथियम, सीसा और तांबे की मांग बढ़ा सकता है।
उभरते बाजार किस तरह के नजर आ रहे हैं?
कुछ उभरते बाजारों के पास काफी जिंस, प्राकृतिक संसाधन हैं और उनका कर्ज कम है, जो तब लाभकारी होगा जब जिंसों की कीमतें बढऩी शुरू होंगी। मेरे पास रूस के शेयर हैं ंऔर भूराजनीतिक संकट नरम पडऩे पर और खरीदारी करूंगा।
भारत के बारे में क्या कहेंगे?
भारतीय इक्विटी मजबूत रहे हैं और दुनिया भर में सबसे अच्छे शेयरों में शामिल हैं। मैं उन बाजारों में खरीद पसंद नहींं करता जो मजबूूत हैं। मैंं गिरावट पर भारतीय शेयर खरीदूंगा। आरबीआई ने पर्याप्त नकदी की आपूर्ति की है, ऐसे में भारतीय इक्विटी बाजार काफी मजबूत बने रह सकते हैं। अभी मेरे पास कोई भी भारतीय शेयर नहींं है।
इक्विटी बाजार के निवेशकों को आपकी क्या सलाह होगी?
जब भी बाजार बाहरी घटनाक्रम मसलन युद्ध से प्रभावित होते हैं तब सामान्य तौर पर खरीदारी का मौका बनता है। मैंं जल्द ही खरीदारी शुरू करूंगा और जिंसों पर ध्यान दूंगा क्योंंकि ये अभी सबसे सस्ती परिसंपत्तियां हैं। लेकिन आप वही खरीदें, जिसके बारे मेंं आप जानते हों।