दुनिया की सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी फाइजर ने अरबिंदो के साथ किए गए समझौते को जल्द ही एशिया और सीआईएस (सोवियत संघ से अलग हुए देशों का राष्ट्रमंडल) के 30 मुल्कों में भी लागू करने का फैसला किया है।
फाइजर ने 3 मार्च को अरबिंदो के साथ अमेरिका और यूरोप में 50 से ज्यादा जेनरिक दवाओं की आपूर्ति का समझौता किया था। सूत्रों का कहना है कि इस बारे में जल्द ही समझौता किया जाएगा, जिसमें रूस, इंडोनेशिया और फिलीपीन्स जैसे देशों को भी शामिल किया जाएगा।
इस कदम से न्यूयॉर्क स्थित फाइजर को यूरोपीय और अमेरिकी बाजार के अलावा भी अपने पैर पसारने का मौका मिलेगा। साथ ही, अरबिंदो की भी कमाई में काफी इजाफा होगा क्योंकि यह उसकी कमाई का एक निश्चित जरिया होगा।
सूत्रों के मुताबिक फाइजर ने अरबिंदो से जो दवा मंगवाई, उनमें नर्वस सिस्टम की दवाएं और पेनसिलीन इंजेक्शन भी शामिल हैं। इनमें से 44 दवाएं खाने वाली हैं, जबकि 12 पेनसिलीन और सेलफ्लोरास्पीन की इंजेक्शनें हैं। अरबिंदो के अध्यक्ष पी.वी. रामप्रसाद रेड्डी का कहना है कि, ‘अभी हमारे बीच जो समझौता हुआ है, उसका लक्ष्य अमेरिकी और यूरोपीय बाजार हैं। हम इस समझौता को अब दूसरे मुल्कों में भी लागू करने के बारे में सोच रहे हैं।’
फाइजर ने यह कदम तब उठाया है, जब नई दवाओं की खोज दिनोंदिन कम होती जा रही है। साथ ही, उसके पेटेंटों के एक्सपायर होने की तादाद बढ़ती ही जा रही है। इससे फाइजर समेत कई बड़ी दवा कंपनियों की कमाई दिनोंदिन कम होती जा रही है।
फाइजर का अरबिंदो के साथ समझौता करने का फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि यूएसएफडीए ने अभी हाल ही में देश की सबसे बड़ी दवा कंपनी, रैनबैक्सी पर जालसाजी करने का आरोप लगाया था। अमेरिकी दवा नियामक का आरोप था कि रैनबैक्सी ने आंकड़ों में हेराफेरी करके भारत में अपने एक उत्पादन केंद्र में बनी दवाओं के लिए उसकी इजाजत हासिल की थी।
फाइजर और अरबिंदो, दोनों ने इस बात के संकेत दिए हैं कि वे इस समझौते के जरिये अपने कारोबार में विस्तार करना चाहती हैं। प्राइसवाटरहाउस-कूपर्स के निदेशक (फार्मास्युटिकल्स प्रैक्टिसेज) सुजॉय शेट्टी ने इस समझौते को सबके लिए फायदेमंद करार दिया है।
उनके मुताबिक दोनों कंपनियों ने एक कामयाब मॉडल को चुना है। उन्होंने कहा, ‘जीएसके और एस्पेन ने भी इसी मॉडल को चुना था। ग्लैक्स-स्मिथलाइन ने एस्पेन के साथ जेनरिक दवाओं के लिए समझौता किया था।’ अभी हाल में हुआ समझौता पिछले साल मई में दोनों कंपनियों के सिर्फ पांच दवाओं के लिए हुए समझौते का विस्तार है।
ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर के फार्मा सेक्टर के प्रमुख रणजीत कपाडिया का कहना है कि, ’51 उत्पादों के साथ अब यह करार काफी बड़ा हो चुका है। यह किसी भारतीय कंपनी के लिए अपनी तरह का पहला करार है। फाइजर के मार्केटिंग मॉडल से अरबिंदो को काफी फायदा होगा।’
अरबिंदो उन कुछेक भारतीय दवा कंपनियों में शामिल है, जिनकी कई दवाओं को एफडीए ने अमेरिका में बेचे जाने की इजाजत दी है। इस कंपनी ने अपनी 145 दवाओं को अमेरिका में बेचने के लिए एफडीए से इजाजत मांगी थी और उसकी 90 दवाओं को इसकी इजाजत मिल चुकी है। कंपनी के सूत्रों का कहना है कि इस साल अरबिंदो 200 आवेदन एफडीए के समक्ष दाखिल करेगी।