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एशियाई कंपनियों की नजर मध्य प्रदेश पर

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Last Updated- December 10, 2022 | 8:17 PM IST

मौजूदा वैश्विक मंदी से मुकाबला करने के लिए दुनिया के विभिन्न हिस्सों, खासकर दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका, से लघु एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) ने मध्य प्रदेश से कच्चे माल की खरीद शुरू कर दी है।
इन उद्यमियों का कहना है कि यह राज्य कृषि-प्रसंस्करण उद्योग, रसायन एवं दवा, हर्बल उत्पादों और हस्तशिल्प उत्पादों के लिए कच्चे माल के निर्यात की क्षमता से लैस है।
मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम द्वारा इंदौर में आयोजित एक मेले में बेलारूस, यूक्रेन, सूरीनाम, सेनेगल, बहामा, जर्मनी, पनामा, बांग्लादेश, नेपाल और मलेशिया से लगभग 75 कंपनियों ने शिरकत की और कच्चे माल एवं कई अन्य उत्पादों की खरीदारी के लिए राज्य में कई कंपनियों और कारोबारियों के साथ बातचीत की और सौदे किए।
जिन उत्पादों के निर्यात के लिए सौदे किए गए, उनमें वाटर पम्प, प्रोसेस्ड वूल फेल्ट्स और डिफेंस सिमुलेटर आदि प्रमुख हैं। इथियोपिया की कंपनी एरकॉम सार्ल ने रसायन आयात के लिए भोपाल की कंपनी हिन्द फार्मा के साथ एक करार किया है।
एरकॉम के महानिदेशक एदामोऊ फोफाना कहते हैं, ‘मध्य प्रदेश हर्बल उत्पादों और रसायनों के निर्यात की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इस राज्य में 12 एग्रो-क्लाइमेटिक जोन्स हैं।’ उन्होंने कहा कि हम जो कच्चा माल अन्य देशों से आयात करते हैं, वह इन राज्यों की कंपनियां हमें सस्ती कीमत पर मुहैया कराएंगी।
सस्ते उत्पादों, खासकर चीन से आने वाले, की बाढ़ ने स्थानीय उद्यमियों के लिए मुश्किल पैदा कर दी है और यह देश के आर्थिक विकास के लिए भी चुनौती बनी हुई है।
राज्य के कोरिया इम्पोर्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष ब्यूंग-सो ली ने सलाह देते हुए कहा, ‘अगर आपकी सरकार कृषि उत्पादों पर ध्यान देती है तो कोरिया अपने आयात का आकार, खासकर चावल के लिए, बढ़ा सकता है।’
उन्होंने ऑर्गेनिक फूड में संभावनाएं तलाशने के लिए व्यापारियों के एक दल के साथ इस एक्सपो में भाग लिया और स्थानीय कंपनियों से बातचीत की थी। मलेशिया, बेलारूस और नेपाल जैसे देश मध्य प्रदेश से चावल और डिजिटल उपकरणों के आयात में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
बेलारूस की एक कंपनी में बिक्री प्रबंधक रुसलाना सत्सुनकेविच कहते हैं, ‘भारतीय एमएसएमई न सिर्फ सस्ते उत्पादों की पेशकश कर रहे हैं बल्कि उनके उत्पादों की गुणवत्ता चीन के उत्पादों की तुलना में अधिक बेहतर है।’
उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि अगर यह राज्य कुछ वादे करे तो हम अपने कारोबार में इजाफा कर सकते हैं। डयूटी एंटाइटलमेंट पास बुक (डीईपीबी) स्कीम के तहत मिलने वाले लाभ से भी एमएसएमई सेगमेंट को मंदी से मुकाबला करने में मदद मिलेगी।
स्थानीय उद्योग चाहते हैं कि भारत सरकार एक नोडल एजेंसी की स्थापना करे ताकि निर्यात से जुड़ी दस्तावेजी प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके। मध्य प्रदेश सरकार ने संकेत दिया है कि वह आगामी औद्योगिक नीति में छोटे उद्योगों के लिए कुछ खास प्रावधान बनाएगी, लेकिन उससे पहले तक निर्यातकों को अपने दम पर नए बाजारों की तलाश करनी होगी।

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First Published - March 16, 2009 | 11:35 PM IST

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