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वीज़ा की आड़ में अमेरिकी जुगाड़

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Last Updated- December 11, 2022 | 2:36 AM IST

अमेरिका की नजर एक बार फिर भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों को लगती महसूस हो रही है।
दरअसल अमेरिका में सीनेटर चक ग्रासले और डिक डर्बिन ने एच 1 बी और एल 1 वीजा के लिए जो नया विधेयक पेश किया है, उसके पारित होने पर आईटी कंपनियों को अपने भारतीय कर्मचारी अमेरिका भेजने में काफी दिक्कतें आ सकती हैं।
यदि कंपनी 50 फीसदी से अधिक कर्मचारियों के पास यह वीजा होगा, तो अतिरिक्त कर्मचारियों को वीजा नहीं मिलेगा। भारतीय आईटी जगत इससे आहत है और उसे लगता है कि हिंदुस्तानी कंपनियों के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए यह अमेरिका का नया हथियार है।
भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों के संगठन नैसकॉम के अध्यक्ष सोम मित्तल ने कहा, ‘इस विधेयक का उद्देश्य बताया गया है, जालसाजी और वीजा के गलत इस्तेमाल को रोकना। लेकिन इसके ज्यादातर प्रावधान मुक्त व्यापार के खिलाफ हैं और इनसे व्यापारिक रुकावटें पैदा हो रही हैं। कई तरीकों से यह भारतीय कंपनियों को निशाना बना रहा है और अमेरिकी बाजार में मुकाबला करने की उनकी क्षमता को भी कम कर रहा है।’
एल 1 वीजा हासिल करना आसान है और यह कम समय के लिए दिया जाता है। यह वीजा ऐसी कंपनियों के कर्मचारी को मिलता है, जिसके दफ्तर उसके मूल देश और अमेरिका दोनों में होते हैं।
नए विधेयक के बारे में ग्रासले ने कहा, ‘इतनी खराब आर्थिक स्थिति में ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिससे किसी भी नौकरी में सबसे पहले अमेरिकी को तरजीह दी जाए। अगर अमेरिकी इस लायक नहीं हों, तो कंपनियां कानूनी आव्रजन कार्यक्रमों का इस्तेमाल कर सकती हैं।’ नए विधेयक में इस बात का खयाल रखा गया है।
अक्टूबरी 2008 में अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसके मुताबिक एच 1 बी वीजा कार्यक्रम के तहत ही लगभग 20 फीसदी लोग गड़बड़ी करते हैं। जेनसार टेक्नोलॉजिज के डिप्टी चेयरमैन और प्रबंध निदेशक गणेश नटराजन इस दावे को बिल्कुल गलत बताते हैं।
वह कहते हैं, ‘यह भारतीय कंपनियों के साथ भेदभाव है। यह भी सच नहीं है कि भारतीय आईटी कंपनियां वीजा प्रणाली के साथ जालसाजी करती हैं। हमारा मानना है कि आईटी कंपनियां वास्तविक उद्देश्यों के लिए ही इस वीजा का इस्तेमाल करती हैं।’
मित्तल भी कहते हैं कि एच 1 बी वीजा का इस्तेमाल अमेरिकियों की नौकरी छीनने के लिए नहीं होता है। उनके मुताबिक भारतीय कंपनियों को पिछले साल केवल 12,000 वीजा दिए गए, जबकि कुल सीमा 85,000 वीजा की है।
नए विधेयक में अंकल सैम के ब्रह्मास्त्र
एच 1 बी वीजा पर कर्मचारी बुलाने की इच्छुक कंपनियों को पहले अमेरिकी कर्मचारी को ही रखने का प्रयास करना होगा।
अमेरिकी कर्मचारी की जगह किसी अन्य को रखने के लिए इस वीजा का इस्तेमाल नहीं होगा।
50 फीसदी से ज्यादा कर्मचारियों के पास यह वीजा होने पर और कर्मचारियों को वीजा नहीं मिलेगा।
अमेरिकी श्रम विभाग उन कंपनियों के खाते जांच सकेगा, जिनके  ज्यादातर कर्मचारियों के पास एच 1 बी वीजा है।

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First Published - April 25, 2009 | 1:12 PM IST

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