भारत सरकार ने इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को लेकर मेटा (Meta) के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। सरकार का कहना है कि वे मेटा की तरफ से औपचारिक जवाब आने के बाद ही सख्त कानूनी फैसला लिया जाएगा।
आईटी सचिव एस. कृष्णन ने हाल ही में ‘CII GCC बिजनेस समिट’ के दौरान स्पष्ट किया कि सरकार इस मुद्दे पर कोई ढिलाई नहीं बरतेगी। उन्होंने कहा कि शनिवार को मेटा को नोटिस भेजकर उन सभी विज्ञापनों और सामग्रियों को तुरंत हटाने का निर्देश दिया गया था, जो बाल यौन शोषण को बढ़ावा दे रहे थे।
आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि मेटा से इस गंभीर चूक पर जवाब तलब किया जाए और कंपनी से यह पूछा जाए कि उसने अब तक इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाए हैं। यह पूरी कार्रवाई बीबीसी की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुई है। रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा किया गया था कि इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम जानबूझकर ऐसे वीडियो को बढ़ावा दे रहा था जिनमें बच्चों का यौन शोषण दिखाया गया था।
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सरकार के कड़े रुख और नोटिस के जवाब में मेटा ने एक विस्तृत ब्लॉग लिखकर अपनी सफाई दी है। कंपनी ने बाल शोषण को एक ‘भयावह अपराध’ बताया और कहा कि वह अपने प्लेटफॉर्म्स से ऐसी सामग्री को हटाने के लिए हर दिन सक्रिय रूप से काम कर रही है। मेटा ने बताया कि वह विज्ञापनों की समीक्षा के लिए ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) और मानव समीक्षकों, दोनों का उपयोग करती है।
कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में उन्होंने वैश्विक स्तर पर बाल शोषण से जुड़ी लगभग 3.6 करोड़ सामग्री हटाई है। भारत के संदर्भ में मेटा ने बताया कि पिछले छह महीनों में एआई उपकरणों की मदद से शोषण संबंधी लिंक साझा करने वाले 1.60 लाख संदिग्ध खातों को बंद किया गया है। कंपनी ने यह भी दावा किया कि उनके पास ऐसी उन्नत प्रणाली है जो संदिग्ध व्यवहार वाले खातों की पहचान करती है और पिछले वर्ष ऐसे 40 लाख से अधिक खातों को खुद ही हटा दिया गया था।
मेटा ने यह स्वीकार किया कि उनकी विज्ञापन समीक्षा प्रणाली हर उल्लंघन को पकड़ने में शत-प्रतिशत सक्षम नहीं है, लेकिन वे अपनी तकनीक को बेहतर बनाने के लिए भारी निवेश कर रहे हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि अपराधियों को पकड़ा जा सके।