टाटा समूह को एयर इंडिया की यात्री आरक्षण प्रणाली में सुधार, विमान कंपनी के बेड़े के उन्नयन और नवीनीकरण करने के लिए एक अरब डॉलर से अधिक का निवेश करना पड़ सकता है, खास तौर पर उन बड़े आकार वाले विमानों के संबंध, जो विमान कंपनी के अंतरराष्ट्रीय परिचालन का मुख्य आधार हैं। जानकार सूत्रों ने यह जानकारी दी है।
हालांकि समूह ने अभी तक इस संबंध में फैसला नहीं किया है कि वह एयर इंडिया को अपनी मौजूदा विमान कंपनियों – एयरएशिया इंडिया और विस्तारा के साथ किस तरह एकीकृत करना चाहता है, लेकिन सूत्रों ने कहा कि पहला काम एयर इंडिया के मौजूदा ऋणों का पुनर्वित्त करना, इसके विमानों का धीरे-धीरे उन्नयन करना और विक्रेताओं तथा आपूर्तिकर्ताओं के साथ कई व्यावसायिक अनुबंधों को दोबारा करना होगा।
दीपम के सचिव तुहिन कांत पांडे ने कई विमानों के निष्क्रिय खड़े होने की पुष्टि करते हुए कहा, ‘विमान कंपनी को स्थिर करने के लिए उन्हें सौ काम करने होंगे और बहुत सारा धन लगाना पड़ेगा।’
सूत्रों ने बताया कि इस अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए परामर्श फर्म पीडब्ल्यूसी और कानून संबंधी सेवा देने वाली फर्म एजेडबी पार्टनर्स को नियुक्त किया गया है।
इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा ‘परिचालनों के एकीकरण पर कोई फैसला तुरंत नहीं लिया जाने वाला है। पहले समूह एयरएशिया का पूर्ण स्वामित्व हासिल करेगा, जो संभवत: मार्च तक होगा और फिर कम लागत वाला आकर्षक परिचालन विकसित करने के लिए इस विमान कंपनी को एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ एकीकृत करेगा। विस्तारा के साथ विलय के किसी भी निर्णय में वक्त लगेगा, क्योंकि इसके लिए सिंगापुर एयरलाइंस से अनुमति की आवश्यकता होगी।’
सरकार से अगले सप्ताह टाटा संस को आशय पत्र (एलओआई) जारी करने की उम्मीद है, जिसके बाद शेयर खरीद करार को औपचारिक रूप दिया जाएगा। टाटा संस के प्रवक्ता ने कहा कि ‘हमें बोली का विजेता घोषित किया गया है। हमें अगले कुछ महीनों में इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सरकार के साथ काम करने की आशा है। हम बाद में ही टिप्पणी कर पाएंगे।’
सूत्र ने कहा है कि फिलहाल पट्टेदारों के साथ दोबारा करार करने पर ध्यान केंद्रित रहेगा। हालांकि सरकार ने 11,939 करोड़ रुपये का पट्टा बकाया भुगतान करने का फैसला किया है, लेकिन विमान का अधिकार टाटा संस को हस्तांतरित करने की आवश्यकता है।
समूह को एयर इंडिया के 15,300 करोड़ रुपये के उस ऋण का भी पुनर्वित्त करना है, जिसे उसने लेने का फैसला किया है। इसके लिए बैंकों के साथ बातचीत करनी होगी, क्योंकि यह ऋण अभी सॉवरिन गारंटी द्वारा समर्थित है, जिसे निजीकरण के बाद हटा दिया जाएगा। सूत्र का कहना है कि हालांकि इस बात को ध्यान में रखते हुए कि टाटा समूह की साख लगभग सरकार के बराबर है, इसमें कोई दिक्कत नहीं होगी, लेकिन फिर भी यह एक जटिल कानूनी कवायद है और इसमें समय लगेगा।
अगली बात है बेड़े का उन्नयन और रखरखाव करने की। हालांकि एयर इंडिया के पास 141 विमानों का बेड़ा है, जिसमें संकीण और चौड़े आकार वाली एयरबस तथा बोइंग विमानों का मिश्रण है, लेकिन विमान कंपनी ने इनमें से केवल 118 को ही उड़ान योग्य स्थिति में टाटा को सौंपने पर सहमति जताई है। एयर इंडिया को 787 वाले बेड़े के लिए पुर्जों और इंजनों की भारी कमी का भी सामना करना पड़ रहा है।