भारतीय स्टार्टअप कंपनियां चुपचाप हाई-टेक क्षेत्र में कदम रख रही हैं। ये स्टार्टअप आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) संचालित सचमुच के औद्योगिक रोबोट बना रही हैं। यह ऐसा उभरता बाजार है जो साल 2030 तक अनुमानित रूप से 100 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर लेगा। सुरक्षा कारणों के मद्देनजर चीन से ह्यूमनॉइड (मानव रोबोट) और क्वाड्रपेड रोबोट (चार पैरों वाले रोबोट) के आयात पर हाल में लगाए अमेरिकी प्रतिबंधों से भी वे फायदा उठाने की उम्मीद कर रहे हैं।
एक कंपनी बेंगलूरु की एटी रोबोटिक्स है जिसने सिलिकन वैली के निवेशकों से ज्यादातर रकम जुटाई है। यह रकम 3.7 करोड़ डॉलर है। एटी रोबोटिक्स अगले साल की शुरुआत में अमेरिकी बाजार के लिए फिजिकल एआई संचालित रोबोट बनाने के लिए मिशिगन में संयंत्र लगाने की योजना बना रही है। स्टार्टअप ऐडवर्ब टेक्नॉलजीज में लगभग 55 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने वाली रिलायंस रिटेल वेंचर्स पहले से ही उद्योग और रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल के लिए अपने फिजिकल एआई रोबोट प्रोटोटाइप का परीक्षण कर रही है। वह वाणिज्यिक शुरुआत के लिए भी उन्हें तैयार कर रही है।
गुरुग्राम की नोवस हाई-टेक रोबोटिक विभिन्न प्रकार के औद्योगिक इस्तेमाल के लिए अपने खुद के ह्यूमनॉइड और क्वाड्रपेड पर काम कर रही है। इन रोबोट्स का प्रमुख सॉफ्टवेयर पूरी तरह से भारत में निर्मित है और इन्हें जल्द ही प्रायोगिक परीक्षण की परियोजनाओं में इस्तेमाल किया जाएगा।
फिजिकल एआई संचालित रोबोट असल दुनिया में चीजों को समझने, सोचने और काम करने के लिए आधुनिक इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हैं। ये स्मार्ट मशीनें रोबोटिक्स उद्योग में बदलाव लाने के लिए तैयार हैं। मशीन-लर्निंग और रियल-टाइम सेंसर के डेटा को मिलाकर ये तेजी से बदलते और अनिश्चित माहौल में आसानी से ढल जाती हैं। ये उन पारंपरिक रोबोट के मुकाबले कहीं अधिक आधुनिक हैं, जो सीमित और खास कामों को बार-बार करने के लिए तय कोड वाले नियमों पर निर्भर रहते हैं।
एटी रोबोटिक्स के संस्थापक सौरभ चंद्रा कहते हैं ‘हम एक औद्योगिक ह्यूमनॉइड ला रहे हैं, जो बिना किसी टेली-ऑपरेशन के कुछ काम करेगा, जैसे फैक्टरी के अंदर 25 किलो वाले पुर्जों के डिब्बे उठाना और उन्हें एक से दूसरी जगह ले जाना वगैरह। हमें उम्मीद है कि अगले साल गर्मियों में उत्पादन शुरू हो जाएगा और अमेरिकी बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए मिशिगन में संयंत्र लगाया जाएगा।’