जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बाइरैक) ने सरकार के करीब 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (आरडीआई) फंड के तहत पहले चरण में 7-8 बायोटेक स्टार्टअप का चयन किया है। इस मामले से अवगत सूत्रों ने यह जानकारी दी।
सूत्रों ने बताया कि चयनित स्टार्टअप में फर्मबॉक्स बायो, रेवेलेशन्स बायोटेक, 4बेसकेयर, सी6 एनर्जी और टेलुरिस बायोटेक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आरडीआई फंड के तहत प्रति स्टार्टअप औसत निवेश लगभग 25 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है।
फरवरी में प्रस्ताव आमंत्रित करने के बाद बाइरैक को बायोटेक स्टार्टअप्स से करीब 200 आवेदन प्राप्त हुए थे। मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल एक व्यक्ति के अनुसार, अब तक लगभग 25 फीसदी आवेदन यानी करीब 50 प्रस्तावों की जांच की जा चुकी है और उनमें से करीब 8 कंपनियों का चयन किया गया है।
इस संबंध में आधिकारिक घोषणा आगामी सप्ताहों में होने की उम्मीद है। बाइरैक ने इस संबंध में जानकारी के लिए बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं दिया।
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) के साथ बाइरैक आरडीआई फंड के तहत द्वितीय स्तर के दो फंड प्रबंधकों में शामिल है। जैव प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष और ऊर्जा बदलाव सहित प्रमुख रणनीतिक क्षेत्रों में वाणिज्यिक तौर पर व्यवहार्य अनुसंधान में सहयोग के लिए पिछले साल आरडीआई फंड को लॉन्च किया गया था।
बाइरैक को पात्र जैव प्रौद्योगिकी परियोजनाओं को ऋण सहायता देने के लिए अनुसंधान नैशनल रिसर्च फाउंडेशन के तहत विशेष प्रयोजन फंड से 2,000 करोड़ रुपये का शुरुआती आवंटन मिलने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि चयनित सभी स्टार्टअप के साथ अनुबंध की शर्तों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। मगर फर्मबॉक्स बायो, रेवेलेशन्स बायोटेक और सी6 एनर्जी के साथ हुए समझौते का कुल मूल्य लगभग 450 करोड़ रुपये है।
बेंगलूरु की कंपनी फर्मबॉक्स बायो को 400 किलोलीटर फर्मेन्टर क्षमता वाली एक बड़े पैमाने की प्रिसिजन फर्मेन्टेशन बायोमैन्युफैक्चरिंग कारखाना स्थापित करने के लिए चुना गया है। इस परियोजना का उद्देश्य दूसरी पीढ़ी के एथनॉल के लिए मेड-इन-इंडिया सेल्युलोसिक एंजाइम और पहली पीढ़ी के एथनॉल के लिए ऐक्टिव ड्राइड डिस्टिलर्स यीस्ट का उत्पादन करना है। इससे घरेलू जैव ईंधन परिवेश को मजबूत किया जा सकेगा। बेंगलूरु की ही सी6 एनर्जी इस फंड का उपयोग समुद्री शैवाल फीडस्टॉक उत्पादन को बढ़ाने के लिए करेगी।
दूसरी ओर हैदराबाद की कंपनी रेवेलेशन्स बायोटेक कृत्रिम जैव प्रौद्योगिकी पर आधारित परियोजना पर काम करेगी। यह परियोजना विटामिन एमके-7 के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए बैसिलस सबटिलिस के मेटाबोलिक इंजीनियरिंग पर केंद्रित है।