दुनिया की अग्रणी कैब एग्रीगेटर ओला ने कहा कि टेमासेक और वारबर्ग पिनकस की इकाई प्लमवुड इन्वेस्टमेंट ने ओला के संस्थापक भवीश अग्रवाल के साथ मिलकर आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से पहले कंपनी में 50 करोड़ डॉलर का निवेश किया है।
घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक शख्स ने कहा, ‘वारबर्ग पिनकस कंपनी की नई निवेशक है और सिंगापुर की टेमासेक 2018 से ही ओला की निवेशक है।’ सूत्रों के अनुसार वित्तपोषण के इस चरण में टेमासेक और वारबर्ग ने ओला के दो मौजूदा निवेशकों से 50 करोड़ डॉलर मूल्य के शेयर खरीदे हैं। टाइगर ग्लोबल और मैट्रिक्स पार्टनर्स इंडिया के पास ओला में 13 से 15 फीसदी हिस्सेदारी थी, जिसे उन्होंने बेच दिया है। उक्त शख्स ने बताया कि टाइगर ग्लोबल कंपनी से अपना कुछ निवेश निकाल चुकी है। सूत्रों के मुताबिक ओला की 22 फीसदी हिस्सेदारी जापान के सॉफ्टबैंक के पास और करीब 9 फीसदी हिस्सेदारी चीन की टेनसेंट के पास है।
यह निवेश तब हुआ है, जब ओला का परिवहन कारोबार कोरोना महामारी की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यह वित्तपोषण भारतीय उपभोक्ता इंटरनेट क्षेत्र में सबसे बड़ा निवेश है। ओला ने कहा कि यह उसके द्वारा तैयार उन्नत तथा सुदृढ़ कारोबार का प्रमाण है। कंपनी लगातार विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में अपने कैब कारोबार का विस्तार कर रही है।
ओला के चेयरमैन और समूह मुख्य कार्याधिकारी भवीश अग्रवाल ने कहा, ‘पिछले 12 महीनों में हमने अपने कैब एग्रीगेटर कारोबार को ज्यादा उन्नत और दक्ष बनाया है। लॉकडाउन के बाद तेजी से सुधार होने और ग्राहकों को सार्वजनिक परिवहन से परहेज होने के कारण हमारे लिए बेहतर मौका साबित हुआ है। मैं वारबर्ग पिनकस और टेमासेक का ओला में स्वागत करता हूं और अगले चरण के विकास के लिए उनका सहयोग करने को तैयार हूं।’
भारत में वारबर्ग पिनकस के प्रमुख और प्रबंध निदेशक विशाल महादेविया ने कहा कि भवीश अग्रवाल और ओला के साथ साझेदारी से वारबर्ग काफी उत्साहित है।
डेटा विश्लेषक फर्म ट्रैक्सन के मुताबिक यह पहला मौका है कि सॉफ्टबैंक समर्थित ओला ने उबर को कड़ी टक्कर दी है और 2019 में सीरीज जे के बाद बड़ा निवेश जुटाया है।
डेटा प्लेटफॉर्म क्रंचबेस के अनुसार ओला ने करीब 3.8 अरब डॉलर जुटाए हैं। कंपनी ने नए वित्तपोषण चरण के मूल्यांकन का खुलासा नहीं किया है। लेकिन 2019 में दक्षिण कोरियाई वाहन कंपनी हुंडई ने जब उसमें निवेश किया था तब कंपनी का मूल्यांकन करीब 6.5 अरब डॉलर था। पिछले साल मई में ओला ने महामारी की वजह से अपने कुल श्रमबल के करीब 33 फीसदी यानी 1,400 कर्मचारियों की छंटनी की थी। इस साल मार्च में कोरोना के कारण कारोबार प्रभावित होने से अमेरिका की निवेश फर्म वैनगार्ड समूह ओला में अपने निवेश का मूल्यांकन घटाकर करीब आधा कर दिया था। कैपिटल क्वेस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन और महामारी की वजह से लोग घर से काम कर रहे हैं, इसलिए एएनआई टेक्नोलॉजीज द्वारा संचालित ओला का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अग्रवाल ने कहा था कि मार्च 2020 में लॉकडाउन होने के बाद से कंपनी की आय करीब 95 फीसदी घट गई है।
यही कारण है कि वैनगार्ड को 31 दिसंबर, 2019 से 30 जून, 2020 के दौरान ओला का मूल्यांकन डॉलर मद में 45 फीसदी कम करना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार 2019 में ओला का मूल्यांकन 6 अरब डॉलर था, जो वैनगार्ड की पहल के बाद घटकर करीब 3.3 अरब डॉलर रह गया।
यह निवेश ऐसे समय में आया है जब ओला आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार ओला अगले कुछ साल में आईपीओ ला सकती है। विश्लेषकों के अनुसार कंपनी सूचीबद्घता के लिए अपना मूल्यांकन करीब 12 अरब डॉलर का लक्ष्य रख सकती है।