क्रिसिल की रेटिंग वाली करीब 354 कंपनियां भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की नकदी प्रवाह सुविधा के तहत ऋणदाताओं से कुल मिलाकर करीब 40,000 करोड़ रुपये के कोविड ऋण हासिल करने के पात्र होंगी। इनमें अधिकतर औषधि कंपनियां और अस्पताल शामिल हैं। हालांकि बैंकों की रेटिंग वाली उधारी में औषधि कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 68 फीसदी और अस्पतालों की हिस्सेदारी 25 फीसदी है। उपलब्ध रकम का अधिकांश लाभ औषधि कंपनियों और अस्पतालों को मिलने की संभावना है।
क्रिसिल की रेटिंग वाले अस्पतालों की उधारी लागत 10.5 फीसदी से 11 फीसदी है। क्रिसिल ने आज एक बयान में कहा कि आरबीआई की योजना के तहत विस्तार के लिए दिए जाने वाले नए ऋण की लागत 300 से 350 आधार अंक कम होगी। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि इससे अस्पतालों की ब्याज लागत में उल्लेखनीय बचत होगी।
क्रिसिल रेटिंग्स के मुख्य रेटिंग अधिकारी सुबोध राय ने कहा, ‘कम लागत पर रकम की उपलब्धता बढऩे से अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने, ऑक्सीजन भंडारण, आईसीयू एवं अन्य महत्त्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों की तैनाती को प्रोत्साहन मिलेगा। यहां तक कि यदि उपलब्ध धन के आधे हिस्से का भी उपयोग अस्पतालों की मौजूदा क्षमता में विस्तार के लिए किया जाए तो अस्पतालों में करीब 5 लाख नए बिस्तर जोड़े जा सकते हैं जो देश की मौजूदा क्षमता का करीब 15 से 20 फीसदी है।’
स्वास्थ्य सेवा से जुड़े अन्य क्षेत्रों जैसे फार्मास्युटिकल्स के लिए कोविड-19 से संबंधित महत्त्वपूर्ण दवाओं की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए पूंजी की बहुत अधिक आवश्यकता नहीं है।
इसके अलावा फार्मास्युटिकल कंपनियों के माकले में उनके मजबूत ऋण प्रोफाइल और निर्यात ऋण सुविधाओं की उपलब्धता के कारण उधारी की औसत लागत अपेक्षाकृत कम (8 से 8.5 फीसदी) होती है। ऐसे में फार्मास्युटिकल कंपनियां आरबीआई की नई योजना के तहत ऋण लेने में संभवत: अधिक दिलचस्पी नहीं दिखाएंगी।
नई योजना के तहत प्रोत्साहन काफी आकर्षक हैं। अस्पताल कंपनियों को मांग और मानव संसाधन एवं उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए इस पर विचार करना चाहिए।