‘उत्पादन का देश’ टैग पर 148 को नोटिस

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 3:33 AM IST

केंद्र ने पिछले तीन महीनों के दौरान ई-कॉमर्स कंपनियों को बेचे गए उत्पादों पर अनिवार्य ‘उत्पादन के देश’ टैग का अनुपालन नहीं करने के लिए 148 नोटिस जारी किए हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘इन 148 नोटिस में से 56 ने अपराध स्वीकार कर लिया है और करीब 34 लाख रुपये चुका दिए हैं। प्रत्येक उत्पाद पर अन्य बुनियादी सूचनाओं सहित उत्पादन का देश प्रदर्शित करना  जरूरी है। ऐसा न करने पर नोटिस जारी किए जाते हैं।’
इस अधिकारी ने कहा, ‘ई-कॉमर्स कंपनियों के मामले में पोर्टल या वेबसाइट पर ब्योरे साफ तौर पर प्रदर्शित किए जाने चाहिए। कंपनियों को अपना पक्ष रखने के लिए एक मौका दिया जाता है और यह बताने को कहा जाता है कि उत्पाद के ब्योरे पता करने के लिए कहां जाना (ऑनलाइन) होगा।’
सरकार ने पिछले साल एमेजॉन, फ्लिपकार्ट जैसे मार्केटप्लेस पर माल बेचने वाले विक्रेताओं के लिए बिक्री वाले आयातित उत्पादों पर इसका उल्लेख करना अनिवार्य किया था ताकि ग्राहकों के पास इन प्लेटफॉर्म पर खरीदारी से पहले उत्पादों की पूरी जानकारी हो। यह नियम भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव और देश में चीन के माल के बहिष्कार की उठती आवाज के बीच लागू किया गया था।
जहां तक जुर्माने के प्रावधानों का सवाल है, विधिक माप-पद्धति अधिनियम के मुताबिक उल्लंघनों के लिए एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। थिंक टैंक इंडिया टेक के मुख्य कार्याधिकारी रमीश कैलाशम ने कहा कि विधिक माप-पद्धति (पैकेटबंद वस्तुएं) नियम, 2011, वस्तु पंजीकरण भौगौलिक संकेतक एवं संरक्षण अधिनियम, 1999 समेत विभिन्न अधिनियमों के तहत माल के उत्पादन के देश की घोषणा करना जरूरी है। कैलाशम ने कहा, ‘उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा अधिसूचित उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम 2020 के अंतर्गत उत्पाद सूचीबद्धता के साथ उत्पादन का देश प्रदर्शित करना जरूरी है। हालांकि इसे अमल में लाने का जिम्मा सरकार और उपभोक्ताओं पर है क्योंकि अगर जानकारी ही नहीं मिलेगी तो किसी प्लेटफॉर्म पर विक्रेता के गलत ब्योरे को पकडऩा मुश्किल होगा।’ उन्होंने कहा कि प्लेटफॉर्मों को पर्याप्त प्रणाली एवं ट्रिगर स्थापित करने की जरूरत है ताकि ऐसे किसी अंतर के बारे में जानकारी दी जाए तो भविष्य में गलत ब्योरे पेश करने पर रोक के लिए उचित सुधार की कार्रवाई की जाए।
बिज़नेस स्टैंडर्ड ने बुधवार को यह खबर दी थी कि केंद्र सरकार ‘उत्पादन के देश’ से संबंधित नियमों को और कड़ा कर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों पर स्थानीय स्तर पर उत्पादित वस्तुओं की बिक्री को प्राथमिकता दे सकती है। ये बदलाव उपभोक्ता संरक्षण नियमों में संशोधन के जरिये किए जाएंगे। 

First Published : June 17, 2021 | 11:15 PM IST