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त्योहारी सीजन में चीनी बिगाड़ेगी बजट! सप्लाई घटने की आशंका से तेजी से बढ़ सकते हैं दाम

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बाजार में उपलब्धता कम हुई तो आने वाले दिनों में चीनी के भाव तेजी से चढ़ सकते हैं, जिसका असर मिठाई और दूसरे खाद्य उत्पादों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है

Last Updated- August 10, 2026 | 10:04 PM IST
Sugar prduction
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

Sugar Price: देश में त्योहारी सीजन की दस्तक की महज आहट से चीनी की कीमतें बढ़नी शुरू हो गई हैं। वैश्विक उत्पादन में कमी की आशंका के चलते पिछले एक महीने में चीनी के दाम करीब 11 फीसदी बढ़ चुके हैं। अल-नीनो का प्रभाव, सूखे और भीषण गर्मी के कारण यूरोपीय यूनियन और यूके में चीनी का उत्पादन घटकर 149.8 लाख मीट्रिक टन रह सकता है, जो 11 वर्षों में सबसे कम है। ऐसे में वैश्विक उत्पादन में गिरावट के साथ-साथ सप्लाई में कमी की आशंका से त्योहारी सीजन के दौरान घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तगड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। 

देश में त्योहारों के सीजन से पहले चीनी की औसत खुदरा कीमत बढ़कर लगभग 50.30 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। पिछले एक महीने में कीमतों में 7 फीसदी से 15 फीसदी तक की तेजी आई है, जिसका मुख्य वजह गन्ने का कम उत्पादन और सीमित सप्लाई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, अगस्त और सितंबर के दौरान बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है, इसलिए 2026-27 में फसल की संभावनाओं के लिए मॉनसून का प्रदर्शन बहुत अहम है।

वैश्विक उत्पादन में गिरावट की आशंका

चीनी के प्रमुख उत्पादक देशों, खासकर भारत, ब्राजील और थाईलैंड में खराब मौसम की आशंकाओं ने बाजार में तेजी का माहौल बनाया है। बारिश और फसल की पैदावार पर अल-नीनो का संभावित असर कीमतों को सहारा देने वाला एक अहम कारक बना हुआ है। वैश्विक आपूर्ति के अनुमान लगातार कमजोर होते जा रहे हैं।

इंटरनेशनल शुगर ऑर्गनाइजेशन को उम्मीद है कि 2026-27 में वैश्विक चीनी उत्पादन सालाना आधार पर 1.15 फीसदी घटकर 1800 लाख मीट्रिक टन रह जाएगा, जिससे 262,000 मीट्रिक टन की कमी होने का अनुमान है।

Also Read: चीनी के बढ़ते भाव एथेनॉल की कीमतों पर डालेंगे असर, पेट्रोल ब्लेंडिंग पर कैसे हो सकता है असर?

अमेरिकी एग्री कमोडिटी रिसर्च संस्था स्टोनेक्स ने अपनी कमी का अनुमान 550,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 1,700,000 लाख मीट्रिक टन कर दिया है, जबकि ग्रीन पोल ने इसे 17.6 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 33 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। कोवरिग एनालिटिक्स (Covrig Analytics) ने भी अपने सरप्लस (अतिरिक्त उत्पादन) के अनुमान को घटाकर 100,000 मीट्रिक टन कर दिया है।

भारत में चीनी उत्पादन बढ़ने का अनुमान

अमेरिकी कृषि विभाग का अनुमान है कि 2026-27 में ग्लोबल उत्पादन 1848.54 लाख मीट्रिक टन होगा, जो सालाना आधार पर 6.5 फीसदी कम है, जबकि खपत 0.4 फीसदी बढ़कर 1799.91 लाख मीट्रिक टन होने की उम्मीद है। ब्राजील का उत्पादन 3 फीसदी घटकर 42.5 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है, जबकि थाईलैंड का उत्पादन 15.6 फीसदी घटकर 95 लाख मीट्रिक टन हो सकता है। इसके उलट, अच्छी बारिश और खेती के रकबे में बढ़ोतरी के कारण भारत का उत्पादन 12 फीसदी बढ़कर 336 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है।

चीनी पर महंगाई की छाया

बाजार जानकारों का कहना है कि वैश्विक उत्पादन कम होने की आशंकाओं के कारण चीनी की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। हालांकि भारत में ज्यादा उत्पादन दूसरी जगहों पर सप्लाई की कमी की कुछ हद तक भरपाई कर सकता है।

दूसरी तरफ, भारत में चीनी के दामों को काबू रखने के लिए सरकार ने कारोबारियों के लिए 30 नवंबर, 2026 तक स्टॉक लिमिट लागू कर दिया है। इसके चलते अब व्यापारी अब एक बार में 4000 क्विंटल से अधिक चीनी स्टोर नहीं कर पाएंगे। साथ ही घरेलू स्तर पर कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए चीनी के निर्यात पर भी इन दिनों सरकार ने पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है। 

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First Published - August 10, 2026 | 9:42 PM IST

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