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तेल कीमतों में उछाल से रुपया फिसला, डॉलर के मुकाबले 0.7% गिरावट; बॉन्ड यील्ड भी चढ़ी

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कारोबार के दौरान भारतीय मुद्रा गिरकर 93.44 प्रति डॉलर पर आ गई, लेकिन अंत में यह पिछले सत्र के 92.73 के मुकाबले 93.38 पर बंद हुई। अप्रैल में रुपया अब तक 1.54 फीसदी मजबूत हुआ है

Last Updated- April 13, 2026 | 11:00 PM IST
Rupee

डॉलर के मुकाबले रुपये में सोमवार को 0.7 फीसदी की गिरावट आई। इसकी वजह यह थी कि ईरान के साथ शांति वार्ता टूटने के बाद अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को रोकने का कदम उठाया, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ गई। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और आयात के चलते महंगाई को लेकर नई चिंताओं के कारण सरकारी बॉन्ड यील्ड में भी मामूली बढ़त देखने को मिली।

कारोबार के दौरान भारतीय मुद्रा गिरकर 93.44 प्रति डॉलर पर आ गई, लेकिन अंत में यह पिछले सत्र के 92.73 के मुकाबले 93.38 पर बंद हुई। अप्रैल में रुपया अब तक 1.54 फीसदी मजबूत हुआ है।

घरेलू मुद्रा कमजोर खुली और पूरे सत्र के दौरान इसमें और गिरावट आई, जिससे यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 50 पैसे से ज्यादा गिर गई। यह गिरावट कुछ समय की स्थिरता के बाद आई है, जिसमें रुपया एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों, पूंजी की आवाजाही और समग्र जोखिम भावना के उतार-चढ़ाव का अनुसरण कर रहा है।

सोमवार को रुपया एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा रही। हालांकि अप्रैल में भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 1.54 फीसदी मजबूत हुई। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भसाली ने कहा, आज रुपया 65 पैसे गिर गया क्योंकि डॉलर इंडेक्स और तेल की कीमतें दोनों बढ़ गईं और तेल कंपनियां डॉलर खरीद रही थीं।

इस बीच, छह करेंसी के बास्केट के मुकाबले डॉलर की मज़बूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.32 फीसदी बढ़कर 98.75 पर पहुंच गया। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 7.69 फीसदी बढ़कर 102.52 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की कीमतों में इस उछाल ने भारत के आयात बिल और महंगाई के परिदृश्य को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि देश कच्चे तेल के आयात पर काफी ज्यादा निर्भर है। इसका असर करेंसी पर भी पड़ा और बाजार के जानकारों ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेशी फंड की आवक में सावधानी बरतने की ओर भी इशारा किया।

एक सरकारी बैंक के फॉरेक्स ट्रेडर ने कहा, रुपया मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी पर प्रतिक्रिया दे रहा है। तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने के साथ ही तेल कंपनियों की ओर से डॉलर की मांग बढ़ गई है, जिससे मुद्रा पर दबाव पड़ रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के जवाब में बॉन्ड यील्ड भी मजबूत हुई। बेंचमार्क 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 6.97 फीसदी तक पहुंच गई और फिर 6.94 फीसदी पर स्थिर हो गई जबकि इसका पिछला बंद स्तर 6.91 फीसदी था। यह बदलाव इस उम्मीद को दर्शाता है कि तेल की ऊंची कीमतें महंगाई को बढ़ा सकती हैं और मौद्रिक ढील की गुंजाइश को सीमित कर सकती हैं।

निजी बैंक के एक डीलर ने कहा, बाजार कमजोरी के साथ खुला लेकिन बाद में इसमें सुधार आया और इसने अपनी लगभग आधी गिरावट की भरपाई कर ली। इसकी मुख्य वजह यह थी कि जिन ट्रेडर्स ने पहले कीमतों में गिरावट पर दांव लगाया था, उन्होंने अपनी पोजीशन को वापस खरीदना शुरू कर दिया, जिससे इस सुधार को सहारा मिला।

बाजार के जानकारों को उम्मीद है कि आगे चलकर रुपया और बॉन्ड यील्ड दोनों ही वैश्विक घटनाक्रमों (कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक जोखिमों) के प्रति संवेदनशील बने रहेंगे।

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First Published - April 13, 2026 | 10:30 PM IST

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