इस हफ्ते 97 प्रति डॉलर के करीब पहुंचने के बाद रुपये ने पिछले दो दिनों में जोरदार वापसी की और चालू सप्ताह में एशिया की सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गई। इसकी वजह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा हाजिर और वायदा दोनों ही बाजारों में भारी दखल देना रहा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भी रुपये को सहारा मिला। इस हफ्ते रुपया डॉलर के मुकाबले 0.29 फीसदी मजबूत हुआ और पिछले दो दिन में इसने 1.2 फीसदी की बढ़त हासिल की।
डॉलर के मुकाबले रुपया आज 0.53 फीसदी सुधरकर 95.69 पर बंद हुआ। गुरुवार को रुपया 96.20 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। हालांकि मई में अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 0.81 फीसदी कमजोर हुआ है।
आईएफए ग्लोबल के संस्थापक और सीईओ अभिषेक गोयनका ने कहा, ‘अपने जोरदार दखल से आरबीआई ने बैंकिंग प्रणाली में डॉलर की भरमार कर दी है।’
डीलरों के अनुसार आरबीआई ने दो दिन में सरकारी बैंकों के जरिये लगभग 2 अरब से 3 अरब डॉलर की बिकवाली की है। जिससे रुपये को 96 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे आने में मदद मिली। उन्होंने कहा, ‘आरबीआई ने गुरुवार और आज घरेलू और विदेशी, दोनों ही जगहों पर खूब दखल दिया जिससे सट्टेबाजों पर लगाम लगाने में मदद मिली।’
आरबीआई के हस्तक्षेप के अलावा कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी रुपये को सहारा दिया। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव को लेकर चिंता कम होने से आयातित मुद्रास्फीति और तेल में तेजी का दबाव घट गया है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत गुरुवार को घटकर 104 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं और आज भी इसी स्तर के आसपास बनी रही जबकि इस हफ्ते की शुरुआत में यह 112 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। अमेरिका और ईरान के बीच एक शांति समझौते के अंतिम मसौदे पर सहमति की खबर से बाजार का माहौल भी बेहतर हुआ है।
होर्मुज स्ट्रेट का फिर से खुलना भारत के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा क्योंकि इससे पश्चिम एशिया के साथ व्यापार का प्रवाह सामान्य हो सकता है।
पिछले दो सत्र में सुधार के बावजूद लंबी अवधि में रुपये पर दबाव बना हुआ है। पिछले एक साल में डॉलर के मुकाबले रुपये में 10.12 फीसदी और इस साल अब तक 6.08 फीसदी की गिरावट आई है।