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RBI ने बनाया नया रिकॉर्ड, रुपये को संभालने के लिए एक साल में बेचे 53.13 अरब डॉलर

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आरबीआई ने विदेशी निवेशकों की निकासी और वैश्विक दबाव के बीच रुपये को संभालने के लिए वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 53.13 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री की

Last Updated- May 22, 2026 | 10:58 PM IST
Reserve Bank of India (RBI)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2025-26 में हाजिर विदेशी मुद्रा बाजार में 53.13 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री की। यह एक वित्त वर्ष में केंद्रीय बैंक द्वारा की गई डॉलर की सबसे बड़ी शुद्ध बिक्री है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान केंद्रीय बैंक ने 34.51 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री की थी।

 केंद्रीय बैंक के मासिक बुलेटिन के अनुसार रिजर्व बैंक ने मार्च में 9.76 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री की, जो वित्त वर्ष 2026 में डॉलर की शुद्ध बिकवाली का तीसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है,  जबकि फरवरी में 7.41 अरब डॉलर की शुद्ध खरीद की गई थी। इस महीने के दौरान केंद्रीय बैंक ने 19.89 अरब डॉलर खरीदे, जबकि 29.64 अरब डॉलर बेचे। 

आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष के अधिकांश समय में रिजर्व बैंक डॉलर का शुद्ध विक्रेता बना रहा, जिसमें अक्टूबर में 11.88 अरब डॉलर की सबसे बड़ी मासिक शुद्ध बिक्री दर्ज की गई, इसके बाद दिसंबर में 10.02 अरब डॉलर की बिक्री हुई। 

जनवरी और फरवरी में केंद्रीय बैंक  शुद्ध खरीदार बन गया था, जबकि मार्च में शुद्ध बिक्री की ओर लौटा।

इस वित्त वर्ष के दौरान रुपया 9.9 प्रतिशत कमजोर हुआ। बाजार सहभागियों ने कहा कि रिजर्व बैंक ने वैश्विक अनिश्चितता, घरेलू इक्विटी और ऋण बाजारों से लगातार विदेशी पूंजी की निकासी और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण रुपये पर निरंतर दबाव के बीच वर्ष के अधिकांश समय डॉलर की आपूर्ति की।

एक निजी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख ने कहा, ‘पिछले एक साल से एफपीआई की भारी निकासी हुई है, जिसकी वजह से रुपये पर दबाव बना रहा और रिजर्व बैंक ने अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए काम किया।’

इस बीच अप्रैल के अंत तक भारतीय रुपये की रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (रीर) 88.06 हो गया, जो मार्च के अंत में 89.23 था।

रीर भारत और उसके प्रमुख व्यापारिक भागीदारों के बीच महंगाई दर के अंतर को ध्यान में रखते हुए नॉमिनल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (एनईईआर) को समायोजित करता है। 100 से ऊपर का रीर मूल्य आधार वर्ष की तुलना में रुपये की मजबूती को दर्शाता है, जिससे वैश्विक बाजारों में भारतीय निर्यात कम प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं।

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First Published - May 22, 2026 | 10:49 PM IST

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