वैश्विक जोखिम को लेकर कमजोर रुख और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त से डॉलर के मज़बूत होने के कारण शुक्रवार को रुपये में गिरावट आई। डीलरों ने बताया कि लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप से नुकसान को सीमित करने में मदद मिली और मुद्रा को 91 रुपये प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने से रोका जा सका। डॉलर के मुकाबले देसी मुद्रा 0.34 फीसदी घटकर 90.99 पर टिकी जबकि एक दिन पहले यह 90.68 पर बंद हुई थी।
देश का विदेशी मुद्रा भंडार 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान 725.7 अरब डॉलर के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और स्वर्ण भंडार दोनों में क्रमशः 3.5 अरब डॉलर और 4.9 अरब डॉलर की वृद्धि के कारण इसमें 8.6 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। इससे पहले मुद्रा भंडार का उच्चतम स्तर 30 जनवरी, 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान 724 अरब डॉलर था।
सप्ताहांत में भू-राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर ट्रेडरों की सतर्कता के बीच सरकारी बॉन्ड यील्ड में भी इजाफा हुआ। बेंचमार्क 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर यील्ड पिछले बंद भाव 6.68 फीसदी के मुकाबले मामूली रूप से बढ़कर 6.72 फीसदी पर पहुंच गया।
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प्राइमरी डीलरशिप के एक डीलर ने कहा, अमेरिका-ईरान तनाव के कारण बहुत सतर्कता बरती जा रही है और लोग सप्ताहांत के दौरान किसी भी घटनाक्रम की आशंका में कोई पोजीशन नहीं लेना चाहते थे। डीलरों ने बताया कि छुट्टियों के दौरान कम कारोबार में मुद्रा के 91 रुपये प्रति डॉलर के निशान से नीचे फिसल गई। इसकी वजह ऑफशोर के नुकसान थे। इसलिए भी रुपया कमजोरी के साथ खुला।
सरकारी बैंक के एक डीलर ने कहा, एनडीएफ बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपया अपने पिछले बंद भाव 90.67 से कमजोर कारोबार कर रहा था। उन्होंने कहा, एनडीएफ बाजार में 91 के महत्त्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को इसने पार किया जिसकी वजह स्थानीय अवकाश के कारण कम तरलता थी।
ट्रेडरों ने कहा कि बाजार में सीमित भागीदारी ने इस कदम को और बढ़ा दिया। साथ ही डॉलर की लगातार मांग और विदेशी बाजारों में इसकी पोजीशन ने स्थानीय मुद्रा पर और दबाव बढ़ाया।
फेडरल रिजर्व द्वारा नीतिगत ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंची बनाए रखने की उम्मीदों ने उभरते बाजारों की मुद्राओं के मुकाबले डॉलर को मजबूती दी है।