facebookmetapixel
Advertisement
ग्लोबल क्राइसिस के बीच PM ने आर्थिक सलाहकारों संग की हाई-लेवल बैठक, संकट के बीच इकोनॉमी बचाने पर चर्चाGoogle ने गुरुग्राम में ली 6.17 लाख वर्ग फुट जगह, 5 साल का किराया जानकर उड़ जाएंगे होश!15 साल के वैभव सूर्यवंशी को आया टीम इंडिया से बुलावा, टूट सकता है सचिन तेंदुलकर का महारिकॉर्ड!सेमीकंडक्टर संकट होगा दूर! FY2035 तक अपनी आधी जरूरतें खुद पूरी करेगा भारत, प्रोडक्शन इसी साल से शुरू1 के बदले मिलेंगे 5 शेयर! IT और AI सेक्टर से जुड़ी नामी कंपनी करने जा रही है स्टॉक स्प्लिट, रिकॉर्ड डेट फिक्सBonus Stocks: अगले हफ्ते बरसेंगे फ्री शेयर, ये 2 कंपनियां देने जा रही हैं बंपर बोनस; नोट कर लें रिकॉर्ड डेटDividend Stocks: कमाई का महामेला! अगल हफ्ते टाटा-अदाणी-इंफोसिस समेत ये 39 कंपनियां देंगी तगड़ा डिविडेंडसरकारी साइबर सुरक्षा को मिलेगा AI का साथ, चुनिंदा एजेंसियों को ‘क्लॉड मिथोस’ का एक्सेस देगी सरकारमहंगाई का यू-टर्न और घटती ग्रोथ: RBI ने माना पश्चिम एशिया संकट से पटरी से उतर रही इकोनॉमीचौथी तिमाही में निजी उपभोग की मांग पस्त, सरकारी खर्चों और पूंजीगत निवेश के भरोसे टिकी GDP

पराली से बनेगी सड़क: CSIR की बायो-बिटुमेन तकनीक से दोहरा फायदा; किसानों को दाम, सड़कों को दम

Advertisement

CSIR ने ' लिग्नोसेलुलोसिक बायोमास से बायो-बिटुमेन-फार्म रेजिड्यू टू रोड्स' तकनीक का उद्योगों को औपचारिक हस्तांतरण किया

Last Updated- March 30, 2026 | 6:54 PM IST
CSIR Bio-Bitumen Technology
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान

CSIR Bio-Bitumen Technology: खेतों में बचा फसल अवशेष अब सड़कों के निर्माण में काम आएगा। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने ‘ लिग्नोसेलुलोसिक बायोमास से बायो-बिटुमेन-फार्म रेजिड्यू टू रोड्स’ ( Bio-Bitumen from Lignocellulosic Biomass – From Farm Residue to Roads) तकनीक का उद्योगों को औपचारिक हस्तांतरण किया। यह तकनीक सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) और सीएसआईआर- भारतीय पेट्रोलियम संस्थान ने संयुक्त रूप से विकसित की है। तकनीक को उद्योग को सोंपने पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी व पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह, सीएसआईआर की महानिदेशक एन. कलैसेल्वी समेत मंत्रालयों, वैज्ञानिकों, उद्योग और किसानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

पराली की समस्या में आएगी कमी

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बायो-बिटुमेन तकनीक को “ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम” बताया, जो कृषि, अवसंरचना और नवाचार को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि बायो-बिटुमेन का उपयोग भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं, नेट-जीरो लक्ष्यों, आत्मनिर्भर भारत, राष्ट्रीय बायो-ऊर्जा मिशन और सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में मजबूत कदम है। खेतों के अवशेष का उच्च-मूल्य अवसंरचना में उपयोग किसानों की अतिरिक्त आय का स्रोत बनेगा और पराली जलाने जैसी समस्याओं में कमी लाएगा। 

Also Read: संसदीय समिति की बड़ी सिफारिश: तिलहन और दलहन की हो 100% MSP खरीद, आयात पर लगे लगाम

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पहल ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा को साकार करती है और कृषि, विज्ञान-प्रौद्योगिकी तथा अवसंरचना क्षेत्रों के प्रभावी समन्वय का उदाहरण है। बायो-बिटुमेन ने टिकाऊपन, पारंपरिक बिटुमेन के साथ अनुकूलता और कम कार्बन उत्सर्जन के मामले में अच्छे परिणाम दिखाए हैं। जिससे यह राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए उपयुक्त है।

कृषि अपशिष्ट प्रदूषण से राहत

डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कहा कि यह विकास पेट्रो-आधारित सामग्री से जैव-आधारित सामग्री की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव है। वर्षों के शोध के बाद विकसित इस तकनीक में कृषि बायोमास और फसल अवशेषों को थर्मो-केमिकल प्रक्रिया से परिवर्तित कर पेट्रोलियम आधारित बिटुमेन के पर्यावरण-अनुकूल और नवीकरणीय विकल्प के रूप में बायो-बिटुमेन तैयार किया जाता है। परीक्षणों में इसका प्रदर्शन पारंपरिक बिटुमेन के बराबर पाया गया है, जबकि पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ भी महत्वपूर्ण हैं। यह उपलब्धि कृषि अपशिष्ट से होने वाले प्रदूषण और आयातित बिटुमेन पर निर्भरता जैसी दोहरी राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करती है।

Also Read: विदेशों में बढ़ी हापुस आम की दीवानगी, हवाई मार्ग से पहली खेप अमेरिका रवाना

क्या है CSIR Bio-Bitumen Technology?

बायो-बिटुमेन तकनीक (Bio-bitumen technology) कृषि अपशिष्ट (जैसे पराली) और बायोमास का उपयोग करके बनाया गया एक पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ पदार्थ है। यह पेट्रोलियम-आधारित बिटुमेन (डामर) का एक स्वदेशी विकल्प है, जो सड़क निर्माण में कार्बन उत्सर्जन को कम करता है। इस तकनीक से प्रदूषण कम करने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है। इसे मुख्य रूप से पायरोलिसिस (pyrolysis) के माध्यम से कृषि अवशेषों और धान की भूसी को ‘बायो-ऑयल’ में बदलकर बनाया जाता है।

Advertisement
First Published - March 30, 2026 | 6:53 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement