ईरान युद्ध के कारण देशभर में वाणिज्यिक एलपीजी आपूर्ति में बाधा का असर अब कॉलेजों और हॉस्टलों के किचन पर पड़ने लगा है। इससे संस्थानों को मेन्यू में बदलाव करने और छात्रों के भोजन को निर्बाध बनाए रखने के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने पड़ रहे हैं। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में झटकों और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के कारण एलपीजी की कमी पैदा हो गई है। जिससे आवासीय परिसरों में बड़े पैमाने पर चलने वाले मेस किचन प्रभावित हो रहे हैं, जो रोजाना हजारों छात्रों मिलने वाले भोजन के ऑर्डर पर निर्भर हैं।
आईआईटी गुवाहाटी के छात्र मामलों के डीन पेरुमल अलगारसामी ने कहा, ‘एलपीजी आपूर्ति में गंभीर बाधा आ गई, जिससे किचन संचालन में शुरुआती दिक्कतें हुईं। लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए कि हर छात्र को बिना रुकावट भोजन मिले, हमने मुख्य मेन्यू आइटम को प्राथमिकता दी और फिलहाल लाइव काउंटर व विशेष व्यंजनों को सीमित कर दिया।’ बड़े आवासीय परिसरों में किचन पूरी तरह वाणिज्यिक एलपीजी पर निर्भर होते हैं, जहां बड़े पैमाने पर खाना बनाने के लिए रोजाना कई सिलिंडरों की खपत होती है। अलगारसामी ने कहा कि आईआईटी गुवाहाटी ने अभी मेस फीस में कोई बदलाव नहीं किया है। उन्होंने ‘हम स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यदि एलपीजी की कीमतों में और वृद्धि होती है, तो आने वाले महीनों में बजट और मेस फीस की समीक्षा करनी पड़ सकती है’। विश्वविद्यालय ने स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए लकड़ी से चलने वाले पारंपरिक चूल्हों जैसे बैकअप विकल्प भी तैयार रखे हैं।
बेंगलूरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट की कैंटीन संचालित करने वाली कंपनी श्री विष्णवे के मैनेजिंग पार्टनर सौरव मजूमदार ने बताया कि उनके यहां एलपीजी की भारी कमी है। पिछले एक सप्ताह से हमें एक भी एलपीजी सिलेंडर नहीं मिला है इसी तरह की परेशानी कई रेस्तरां, कैंटीन और कैफे झेल रहे हैं। बीएमएस कॉलेज ने इस संकट से निपटने के लिए इलेक्ट्रिक कुकिंग सिस्टम अपनाया है और अब इंडक्शन स्टोव व हीटर के जरिए काम चलाया जा रहा है, जबकि पहले रोजाना 2 से 3 वाणिज्यिक सिलेंडर इस्तेमाल होते थे। मजूमदार ने कहा, ‘हमने तेजी से इलेक्ट्रिक कुकिंग की ओर रुख किया, जिससे संचालन जारी रह सका। इससे हम अपने 200 आइटम वाले मेन्यू का लगभग 80 फीसदी बनाए रखने में सफल रहे हैं।’
उन्होंने आगे कहा कि हम छात्रों को सब्सिडी दर पर भोजन उपलब्ध कराते हैं। जब केवल ईंधन की लागत ही आय का बड़ा हिस्सा खा जाए, तो संचालन चलाना मुश्किल हो जाता है। छोटे खाद्य संचालकों के लिए यह व्यवस्था टिकाऊ नहीं है, फिर भी हमसे अपेक्षा की जाती है कि हम कीमतें न बढ़ाएं, जो लंबे समय में संभव नहीं है। भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में हॉस्टल महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जहां बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए घर से दूर रहते हैं। अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण 2021-22 के अनुसार देशभर में 40,000 से अधिक हॉस्टल हैं, जिनमें 35 लाख से ज्यादा छात्र रहते हैं।
मुंबई स्थित नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के फूड एंड बेवरेज क्वालिटी कंट्रोल निदेशक कैकोबाद बोकदावाला ने बताया कि संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए मेन्यू को घटाकर 3 से 4 आइटम तक सीमित कर दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘हम दक्षता बनाए रखने के लिए इंडक्शन और एलपीजी दोनों का मिश्रित उपयोग कर रहे हैं।’ कुछ संस्थानों पर अभी तक सीधा असर नहीं पड़ा है, लेकिन वे एहतियाती कदम उठा रहे हैं। बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा के प्रवक्ता ने कहा कि उनके यहां एलपीजी आपूर्ति फिलहाल सामान्य है, लेकिन एहतियात के तौर पर मेन्यू में बदलाव किया गया है।
प्रवक्ता ने कहा, ‘हमारा दृष्टिकोण सुधारात्मक नहीं, बल्कि पहले से सावधानी बरतने वाला है। नियमित खपत ऑडिट, सप्लायर की समीक्षा और स्टोरेज योजना पहले से ही लागू है। किचन टीमें खपत के पैटर्न पर नजर रखती हैं और उसी के अनुसार खरीद योजना बनाती हैं। इसके अलावा संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए मेन्यू में बदलाव किया गया है। जिससे बिना बड़े बदलाव के संचालन सुचारू और प्रभावी बना रहे।’