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संसद के बदले समीकरण: बैठकें कम होने के बावजूद विधेयक पारित होने की रफ्तार बरकरार, जानें आंकड़े

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भारतीय संसद में बैठकों की संख्या घटने के बावजूद विधेयक पारित होने का औसत स्थिर है। 17वीं लोक सभा में विधायी सफलता का प्रतिशत बढ़कर 92% पहुंच गया

Last Updated- April 24, 2026 | 11:10 PM IST
Parliament
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

लोक सभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पारित कराने में विफल रहने के एक दिन बाद 18 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व की भ्रूण हत्या करने का तीखा आरोप लगाया। विधेयकों का पास या असफल होना जहां लोकतंत्र का हिस्सा है, वहीं ऐतिहासिक रूप से आंकड़े गवाह हैं कि 1952 से लेकर 2025 के बीच 12,395 बैठकों में दोनों सदनों में कुल 4,070 विधेयक ही पारित किए गए हैं। संसद में पेश किए गए 131 संवैधानिक संशोधन विधेयकों में से 25 पारित नहीं हो सके। विधायी प्रक्रिया की कामयाबी की तस्वीर समय के साथ बदली और बेहतर हुई है। पेश किए गए विधेयकों में से पारित होने वाले विधेयकों का प्रतिशत 15वीं लोक सभा के दौरान 56 प्रतिशत था, जो 17वीं लोक सभा के दौरान बढ़कर 92 प्रतिशत हो गया।

एक और खास बात यह है कि इस दौरान संसदीय बैठकें तो कम हो गई है, लेकिन प्रति बैठक पारित हो वाले विधेयकों की संख्या लगभग पहले जैसी ही बनी हुई है। प्रथम लोक सभा में पांच संवैधानिक संशोधन विधेयक लाए गए थे, जो 5वीं लोक सभा (जिसमें आपातकाल का हिस्सा भी शामिल था) में बढ़कर 18 हो गए। उसके बाद 14वीं में यह आंकड़ा घटकर पुन: पांच पर आ गया। सरकार के पिछले तीन कार्यकाल में ऐसे विधेयक तीन-तीन ही रहे।

सर्वाधिक प्रतिनिधित्व वाले दलों में शामिल शिव सेना, वाईएसआरसीपी और डीएमके के सांसदों ने 17वीं लोक सभा में अधिक सवाल पूछे, जिससे प्रति सांसद पूछे गए प्रश्नों की औसत संख्या में वृद्धि हुई।

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First Published - April 24, 2026 | 10:46 PM IST

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