फंड्सइंडिया ने एक नोट में कहा है कि लंबी अवधि में सालाना चक्रवृद्धि प्रतिफल के मामले में सोने में निवेश ने अधिकांश परिसंपत्ति वर्गों को पीछे छोड़ दिया है। जहां भारतीय शेयरों ने 20 वर्षों में 13.5 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि के हिसाब से प्रतिफल दिया (निफ्टी 50 कुल प्रतिफल सूचकांक-टीआरआई-के अनुसार), वहीं इस दौरान रुपये के लिहाज से सोने में 15 फीसदी की वृद्धि हुई।
फंड्सइंडिया के अध्ययन के अनुसार 7.8 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि के साथ रियल एस्टेट और 7.6 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि के साथ डेट इस पिरामिड के निचले पायदान पर थे। आंकड़ों से पता चलता है कि रुपये के लिहाज से भारतीय इक्विटी से 20 वर्षों में 13.5 फीसदी का सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न मिला जबकि अमेरिकी इक्विटी का रुपये के संदर्भ में रिटर्न 14.8 फीसदी रहा। इस बीच, नोट में कहा गया है कि अचल संपत्ति से होने वाले रिटर्न की गणना एनएचबी रेसिडेक्स के आधार पर की गई है (दिसंबर 2002 से दिसंबर 2008 तक की अवधि के रिटर्न को 5 शहरों के लिए और दिसंबर 2008 के बाद सितंबर 2025 तक 15 शहरों के लिए माना गया है) और इसे सितंबर 2025 तक अपडेट किया गया है।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और अनुसंधान प्रमुख जी चोकालिंगम ने कहा, सोने की मांग में वृद्धि का मुख्य कारण दुनिया भर में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी है। इससे कीमतें ऊपर की ओर बनी रहीं। उन्होंने कहा, इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में केंद्रीय बैंक की आक्रामक नीतियों, भू-राजनीतिक चिंताओं, रुपये के अवमूल्यन और शेयरों के महंगे भाव के के बीच खुदरा निवेशकों के लिए सोने में सुरक्षित निवेश का आकर्षण कभी कम नहीं हुआ।
फंड्सइंडिया की रिपोर्ट के अनुसार 5 साल की छोटी अवधि में सोने से प्राप्त सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न 23.2 फीसदी रहा जो भारतीय इक्विटी के 16.5 फीसदी और अमेरिकी इक्विटी के 19.6 फीसदी रिटर्न की तुलना में कहीं बेहतर है। शानदार रिटर्न के बावजूद विशेषज्ञ आने वाले वर्ष में सोने की कीमतों में और अधिक वृद्धि की संभावना देख रहे हैं। उनका मानना है कि भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत मांग से कीमतों में बढ़ोतरी होगी। उनका मानना है कि सोने की कीमत में वृद्धि को बढ़ावा देने वाले अन्य कारकों में खनन में चुनौतियां, उत्पादन की सीमा और अंततः मांग अधिक रहने पर आपूर्ति पर पड़ने वाला प्रभाव शामिल है।
ब्रिटेन की दि गोल्ड बुलियन कंपनी के प्रबंध निदेशक रिक कांडा ने कहा, अनुमान लगाया जा रहा है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमत 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद जारी रखने की उम्मीद है, जो सोने को 5,000 डॉलर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। सोने की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि जारी रहेगी, खासकर अगर मौजूदा मुद्रास्फीति और अनिश्चितता का दौर बना रहता है।
फंड्सइंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इक्विटी सेगमेंट में मिडकैप और स्मॉलकैप से 20 वर्षीय सीएजीआर रिटर्न क्रमशः 16.5 फीसदी (निफ्टी मिडकैप 150 टीआरआई) और 14.3 फीसदी (निफ्टी स्मॉलकैप 250 टीआरआई) रहा जो लार्जकैप (निफ्टी 100 टीआरआई) के 13.8 फीसदी से ज्यादा था।
चोकालिंगम ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारतीय खुदरा निवेशकों के निवेश करने के तरीके में संरचनात्मक बदलाव आया है, जिसमें अधिकांश निवेशक जल्दी मुनाफा कमाने के लिए मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं। चोकालिंगम ने कहा, 10 साल पहले खुदरा निवेशकों की संख्या लगभग 6 से 6.5 करोड़ थी जो अब बढ़कर 20 करोड़ से अधिक हो गई है।