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Economic Survey 2026: AI की रणनीति में जमीनी हकीकत का जरूर रखें ध्यान

आर्थिक समीक्षा में डेटा सेंटर क्षमता के विस्तार सहित एआई के आधारभूत ढांचे में जारी त्वरित विकास को लेकर चेताया गया है

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बीएस संवाददाता   
Last Updated- January 29, 2026 | 11:03 PM IST

भारत अपनी आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) रणनीति में विश्व की आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं के बड़े लैंग्वेज मॉडल का अनुसरण करने के बजाय अर्थव्यवस्था की जमीनी हकीकत पर अनिवार्य रूप से ध्यान दे। यह सुझाव आर्थिक समीक्षा 2025-26 में दिया गया।

आर्थिक समीक्षा में डेटा सेंटर क्षमता के विस्तार सहित एआई के आधारभूत ढांचे में जारी त्वरित विकास को लेकर चेताया गया है। समीक्षा में कहा गया कि एआई आधारभूत ढांचे में हालिया समय के दौरान हुए अत्यधिक निवेश ने उन व्यावसायिक मॉडलों को उजागर किया है जो आशावादी निष्पादन समयसीमा, ग्राहक पर कम ध्यान केंद्रित करने और दीर्घकालिक पूंजी प्रतिबद्धताओं पर निर्भर हैं।

आर्थिक समीक्षा में इंगित किया गया, ‘इस क्षेत्र में करेक्शन से तकनीकी स्वीकृति समाप्त नहीं होगी लेकिन इससे वित्तीय स्थितियां और कठिन हो सकती हैं। इस क्रम में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है और इसका व्यापक पूंजी बाजारों पर प्रभाव पड़ सकता है।’ समीक्षा में यह भी कहा गया कि इस तरह के संकट के व्यापक आर्थिक परिणाम 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट से भी बदतर हो सकते हैं।

समीक्षा में कहा गया है कि भारत जैसे देशों में बिजली, पानी और धन जैसे संसाधन की कमी व्याप्त है। बिजली का अत्यधिक उपयोग करने वाले इन एआई संसाधनों का अंधाधुंध विस्तार दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं है। ये संसाधन घरों और अन्य उद्योगों की समान मांगों के साथ सीधे प्रतिस्पर्धा करते हैं।

नैसकॉम के अनुसार दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत डेटा का उत्पादन भारत करता है लेकिन भारत में दुनिया भर के लगभग 11,000 डेटा सेंटर्स में से केवल 3 प्रतिशत यानी करीब150 डेटा सेंटर्स हैं। जेएलएल के अनुमान के अनुसार एआई तकनीकों और नियामकीय घटनाक्रमों जैसे डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023 और भारतीय रिजर्व बैंक के डेटा लोकलाइजेशन दिशानिर्देशों के कारण ऐसे सेंटरों की मांग आने वाले समय में तेजी से बढ़ सकती है।

भारत को ऐसे सेंटरों को तेजी से आगे बढ़ने की बजाए ‘ऐप्लिेकशन लेड इनोवेशन, घरेलू डेटा के बेहतर इस्तेमाल, मानव पूंजी की प्रचुरता और सार्वजनिक संस्थाओं के विकेंद्रीकृत प्रयासों के समन्वय की क्षमता’ पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।’

समीक्षा में कहा गया है, ‘जमीनी स्तर से आगे बढ़ती खुली व अंतरसंचालनीय प्रणालियां, क्षेत्र-विशिष्ट मॉडलों और फिजिक्ल व डिजिटल आधारभूत ढांचे का साझा मॉडल मूल्यवर्धन का अधिक विश्वसनीय मार्ग है।’

इस एआई नीति को लागू करने का पहला चरण इंडिया एआई मिशन सहित केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत पहले से घोषित संस्थानों को परिचालन में लाना होना चाहिए।

समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि सरकार को इंडिया एआई मिशन के तहत शामिल साझा एआई आधारभूत ढांचे की पहुंच बढ़ाकर एआई प्रयोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए और जमीनी स्तर पर अनुसंधान को बढ़ावा देना चाहिए। यह भी सलाह दी गई है कि कुशल संसाधन उपयोग को सक्षम बनाने के लिए अनुप्रयोगों और क्षेत्र-विशिष्ट, छोटे और कम लागत वाले मॉडलों पर स्पष्ट ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

ये तंत्र (मैकेनिज्म) एक बार कार्य करना शुरू कर दें और एआई के साथ प्रयोग करने की अनुमति प्राप्त स्टार्टअप सार्वजनिक और आर्थिक उपयोगिता के प्रमाण प्रस्तुत करें तो मध्यम अवधि की नीति को चयनात्मक विस्तार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

First Published : January 29, 2026 | 10:47 PM IST