Budget 2026: सरकार ने शेयर पुनर्खरीद के लिए कराधान ढांचे में एक और महत्त्वपूर्ण बदलाव का प्रस्ताव किया है। पहले पुनर्खरीद से मिली रकम को लाभांश आय माना जाता था, लेकिन अब इस पर पूंजीगत लाभ कर लगेगा। सरकार ने कहा कि इस बदलाव का उद्देश्य मौजूदा ढांचे को सही बनाना और मध्यस्थता की संभावनाओं को रोकना है।
मौजूदा प्रावधानों के तहत कंपनी द्वारा शेयरों की पुनर्खरीद पर शेयरधारकों द्वारा प्राप्त आमदनी को लाभांश आय माना जाता है और इस पर व्यक्तिगत आयकर स्लैब के अनुसार कर लगाया जाता है। वहीं लेन-देन में समाप्त किए गए शेयरों की अधिग्रहण लागत को अलग से पूंजीगत हानि के रूप में माना जाता है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इस दोहरे व्यवहार से जटिलता और असमान कर की समस्या आती है।
प्रस्तावित संशोधनों के तहत पुनर्खरीद से आमदनी को लाभांश आय के रूप में वर्गीकृत करने के बजाय पूरी तरह से ‘पूंजीगत लाभ’ के तहत माना जाएगा और अधिग्रहण की लागत को लाभ की गणना में शामिल किया जाएगा।
दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर प्रभावी कर की दर लगभग 12.5 प्रतिशत है। हालांकि नए ढांचे में एक विभेदित कर व्यवस्था होगी जिसमें प्रमोटरों और गैर-प्रमोटरों को अधिक कर का भुगतान करना होगा। 1 अप्रैल से कॉरपोरेट प्रमोटरों के लिए प्रभावी कर की दर 22 प्रतिशत होगी, जबकि गैर-कॉरपोरेट प्रमोटरों पर प्रभावी कर की दर 30 प्रतिशत होगी। राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि पुनर्खरीद कर पर यह फैसला निवेशकों के लिए राहत है।
वहीं कानून से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा कि संशोधित संरचना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुनर्खरीद का फैसला मुख्य रूप से प्रमोटर समूहों को लाभ पहुंचाने के बजाय सभी शेयरधारकों के हित में लिए जाएं।
मौजूदा कर ढांचे को बड़े शेयरधारकों के लिए नुकसानदायक माना जा रहा था। नतीजतन, इन्फोसिस के 18,000 करोड़ रुपये के शेयर पुनर्खरीद कार्यक्रम को छोड़कर अक्टूबर 2024 के बाद से किसी बड़ी पुनर्खरीद पेशकश की घोषणा नहीं की गई है, , जिसमें प्रमोटरों ने भाग नहीं लिया था।
कर विशेषज्ञों ने कहा कि नया ढांचा एक बार फिर कंपनियों को लाभांश हासिल करने के बजाय शेयरधारकों को पुरस्कृत करने के साधन के रूप में काम करने को प्रेरित कर सकता है। खासकर अधिक नकदी वाली आईटी फर्में इसके लिए प्रेरित हो सकती हैं।
शेयर बाजार के कमजोर माहौल के बावजूद रविवार को निफ्टी आईटी सूचकांक 0.6 प्रतिशत बढ़ा है। इसमें विप्रो और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयर क्रमशः 2 प्रतिशत और 1.7 प्रतिशत चढ़े हैं।
ध्रुव एडवाइजर्स के पार्टनर वैभव गुप्त ने कहा, ‘पुनर्खरीद पर कर व्यवस्था को पहले की तरह पूंजीगत लाभ के रूप में मानना, खुदरा और गैर-प्रमोटर शेयरधारकों के लिए सकारात्मक है। यहां तक कि प्रमोटर शेयरधारकों के लिए भी यह पुनर्खरीद आय के मुकाबले लागत का बोझ कम करने में सक्षम होगा, जिसमें पूंजीगत लाभ पर अतिरिक्त आयकर देय होता है।’ हालांकि गुप्त ने आगाह किया कि अक्टूबर 2024 में पेश किया गया ढांचा आगे चलकर मुकदमेबाजी को जन्म दे सकता है।
उन्होंने कहा, ‘पुनर्खरीद आय के मुकाबले पूंजीगत हानियों को ऑफसेट करने की अनुमति कर अधिकारियों द्वारा नहीं दी जा सकती है, खासकर जहां उसी वर्ष में अन्य पूंजीगत लाभ भी हैं, क्योंकि इससे प्रमोटरों द्वारा देय अतिरिक्त आयकर कम हो सकता है।’