Business Standard
Advertisement
EPFO Withdrawal Rules: PF निकालने की सोच रहे हैं? पहले समझ लें एक महीने में कितनी बार कर सकते हैं क्लेम, कब कटेगा TDSफैक्ट्रियों की रफ्तार पड़ी धीमी! जून में मैन्युफैक्चरिंग PMI तीन महीने के निचले स्तर परKharif Crops: धान, दाल, कपास… किस फसल की बुवाई सबसे ज्यादा घटी? जानिए पूरी तस्वीरGST कलेक्शन जून में 14% बढ़कर ₹1.95 लाख करोड़, आयात से टैक्स रेवेन्यू 35% बढ़ादिल्ली की नई EV पॉलिसी से Ather, Mahindra और Tata को मिलेगी रफ्तार! पूरे देश में तेज होगी इले​क्ट्रिक रेसGold, Silver Price Today: सोना ₹1,578 और चांदी ₹5,505 टूटी, क्या अब और गिरेंगे भाव?Fuel Price: पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 सस्ता! इस कंपनी ने ग्राहकों को दी बड़ी राहतAdvit Jewels की शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री, लिस्टिंग के साथ निवेशकों को 37% तक का मुनाफाक्रिप्टो से ट्रंप की तगड़ी कमाई! एक साल में ₹12,000 करोड़ से ज्यादा की इनकमAMFI की नई लिस्ट जल्द, BSE और Vodafone Idea समेत कई शेयरों की बदल सकती है कैटेगरी
अन्य समाचार विस्मृत हो चुके हैं भगवान शिव की आरती ओम जय जगदीश... के रचयिता
'

विस्मृत हो चुके हैं भगवान शिव की आरती ओम जय जगदीश... के रचयिता

PTI

- September,30 2013 6:23 PM IST

जालंधर, 30 सितंबर :भाषा: दुनिया भर में हिंदूओं के घरों और मंदिरों मंे भगवान शिव की सुप्रसिद्ध आरती ओम जय जगदीश हरे..... गाया जाता है। लेकिन शायद बहुत कम लोग को यह पता होगा कि इसके रचयिता पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी हैं। यह आश्चर्यजनक है कि न केवल देश भर के लोग बल्कि जालंधर के लोगों के जेहन से भी वह विस्मृत हो चुके हैं।

ऐतिहासिक और साहित्यिक साक्ष्यों के अनुसार जालंधर जिले के फिल्लौर इलाके में एक ब्राहमण परिवार में आज के ही दिन 1830 में जन्में पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी ने ठीक 150 साल पहले अर्थात 1863 मंे भगवान शिव की महाआरती की रचना की थी। जिसे आज न केवल देश भर के बल्कि पूरी दूनिया के हिंदू घरों में और मंदिरों में बडी श्रद्धा और विश्वास के साथ गाया जाता है।

अमृतसर स्थित गुरू नानक देव विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष तथा फिल्लौरी पर शोध कार्य करने वाले प्राध्यापक एवं साहित्यकार डा हरमोहिंदर सिंह बेदी ने भाषा को बताया, पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी न केवल ओम जय जगदीश हरे..... के रचयिता थे बल्कि वह स्वतंत्रता सेनानी, धर्म का उपदेशक देने वाले थे। वह हिंदी और पंजाबी के बडे साहित्यकार भी थे।

फिल्लौरी पर तीन खंड मंे ग्रंथावली लिख चुके बेदी ने कहा, उन्होंने भाग्यवती उपन्यास की रचना की थी। इसके बाद उन्हें हिंदी का पहला उपन्यासकार कहा जाने लगा। इसके अलावा उन्होंने दर्जनों अन्य किताबें लिखी थी जिसमें कुछ पंजाबी भाषा की भी हैं।

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement