| कर्नाटक में लौह अयस्क का खनन शुरू | | महेश कुलकर्णी / बेंगलूर August 17, 2012 | | | | |
उच्चतम न्यायालय की तरफ से लगाई गई पाबंदी के 13 महीने बाद चित्रदुर्ग जिले में स्थित ए श्रेणी की खदान में लौह अयस्क का खनन शुक्रवार को फिर से शुरू हो गया।
बेंगलूर की कंपनी मिनरल एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एमईएल) के पास चित्रदुर्ग तालुके व जिले में (एमएल नंबर 2346) 102 हेक्टेयर में लौह अयस्क की खदान है। कंपनी ने शुक्रवार को वहां एक बार फिर खनन शुरू कर दिया, लिहाजा उम्मीद की जा रही है कि अयस्क की किल्लत से जूझ रहे स्टील उद्योग को अयस्क की आपूर्ति बहाल हो जाएगी। कंपनी को उम्मीद है कि अगले 10 दिन में वह लौह अयस्क बाजार में उतार देगी।
एमईएल के प्रबंध निदेशक बसंत पोद्दार ने कहा - 'हम उच्चतम न्यायालय की तरफ से नियुक्त केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति द्वारा मंजूर 16 खनन पट्टों में शामिल हैं। इससे पहले सीईसी ने आईसीएफआरई द्वारा सौंपी गई राहत व पुनर्वास योजना स्वीकार की थी। हालांकि भारतीय खनन ब्यूरो, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण संबंधी मंजूरी आदि से मंजूरी हासिल करने वालों में हम अव्वल हैं यानी हमने सबसे पहले इन विभागों से मंजूरी हासिल की है।'जेएसडब्ल्यू स्टील, बीएमएम इस्पात और कल्याणी स्टील समेत दूसरी कंपनियों के साथ-साथ कर्नाटक के आसपास मौजूद स्पंज आयरन इकाइयों को पर्याप्त लौह अयस्क नहीं मिल पा रहा है और उनके पास महज 30 दिन का स्टॉक है। खनन व भूविज्ञान विभाग के निदेशक ने कंपनी को दिए अंतिम मंजूरी पत्र में कहा है कि कंपनी सालाना 3.80 लाख टन लौह अयस्क का खनन कर सकती है जबकि मूल रूप से इसे 10 लाख टन क्षमता आवंटित हुई है।
पोद्दार ने कहा कि कंपनी की खनन योजना और पट्टा 6 अक्टूबर 2012 को एक्सपायर हो जाएगा और कंपनी ने इसके नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है। हालांकि पट्टे के नवीनीकरण की प्रक्रिया में एक साल तक का वक्त लगता है और उन्होंने कहा कि कंपनी 6 अक्टूबर तक अधिकतम अयस्क का खनन करेगी। इससे पहले सीईसी ने 16 खनन पट्टे (ए श्रेणी में 13 जबकि बी श्रेणी में 3) को मंजूरी दी थी और इन्हें 82.4 लाख टन अयस्क के उत्पादन की अनुमति मिली है, जो इन खदानों को आवंटित क्षमता की एक तिहाई है। आईबीएम हर खनन पट्टे के उत्पादन क्षमता को तय करने पर काम कर रहा है, ताकि कुल उत्पादन सालाना 3 करोड़ टन को पार न कर पाए। इस तरह का निर्देश उच्चतम न्यायालय ने इस साल अप्रैल में दिया था।
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