ब्रिटेन में भारतीय छात्रों की घटती संख्या के कारण कई विश्वविद्यालयों के सामने विभिन्न विभागों की वित्तीय समस्याएं पैदा होने लगी हैं । विशेष तौर पर विग्यान, तकनीकी, अभियांत्रिकी और गणित जैसे विषयों के विभागों को लेकर विश्वविद्यालयों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं ।
इस महीने के अंत में शुरू हो रहे नए शैक्षणिक सत्र में भारतीय छात्रों की संख्या में 20 से 30 प्रतिशत की कमी आयी है । इस कमी के कारण विग्यान, तकनीकी, अभियांत्रिकी और गणित विभागों को काफी चिंता हो रही है क्योंकि इन विषयों के स्नातकोतर पाठ्यक्रम भारतीय छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय थे ।
संसद की व्यापार, नवोन्मेष और कौशल समिति के सामने पेश मौखिक बयानों में उच्च शिक्षा और उद्योग जगत की शीर्ष हस्तियों ने कुलपतियों के बीच की चिंता को पहचाना है । भारतीय छात्रों में आयी कमी के कारण विग्यान, तकनीकी, अभियांत्रिकी और गणित जैसे विभागों को वित्तीय समस्या का सामना करने की आशंका जतायी गयी है ।
पिछले सप्ताह विदेशी छात्रों और आव्रजक शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट में समिति ने सिफारिश की है कि भारतीयों और गैर-यूरोपीय संघ के छात्रों को कुल आव्रजकों की सूची में शामिल नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि उनमें से ज्यादातर छात्र अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद वापस लौट जाते हैं ।