केदारनाथ में आयी त्रासदी से सुरक्षित बचे लेकिन अपने समूह में सात लोगों की जान गंवाने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता अश्विनी चौबे ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिये सरकार से जानना चाहा कि उसने राज्य में फंसे तीर्थयात्रियों के लिए क्या कदम उठाये ं।
चौबे ने कहा कि उत्तराखंड पीडि़तों के लिए उठाये गये कदमों के बारे में बिहार सरकार के सारे दावे कागजी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में कोई राहत शिविर नहीं लगाया गया।
नीतीश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके चौबे ने कहा कि जहां अन्य राज्यों ने अपने नागरिकों के लिए व्यापक इंतजाम किये थे, बिहार ने बहुत कम प्रयास किये। चौबे जिस समय उत्तराखंड में थे, उसी समय उन्हें अन्य भाजपा मंत्रियों के साथ सरकार से बर्खास्त कर दिया गया था।
उन्होंने सरकार पर इस बात को लेकर भी हमला किया कि तीन पुलिसकर्मियों, स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी और दो रिश्तेदारों सहित सात सदस्यों वाले समूह को मृतकों की सूची में शमिल नहीं किया गया।
आपदा प्रबंधन मंत्री रेणु कुमारी ने कहा कि राज्य मंत्री ने पुष्टि के लिए उत्तराखंड के लोगों को 58 लोगों की एक सूची सौंपी है। उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाये गये कदमों की भी जानकारी दी।
बहरहाल, असंतुष्ट भाजपा सदस्य सदन में आसन के समक्ष आ गये तथा उत्तरखंड तीर्थयात्रियों के प्रति असंवेदनशीलता दिखाने के लिए सरकार एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।