facebookmetapixel
Advertisement
Anti Paper Leak Law: अमेरिका, चीन, जापान समेत दुनिया के देशों में परीक्षा में नकल पर क्या है सजा? जानिए नियमदिल्ली लक्ष्मी योजना के लिए कैसे करें आवेदन? महिलाओं के खातें में हर महीने आएंगे ₹2,500Ambuja Cements Share: कमजोर Q1 नतीजों के बावजूद ब्रोकरेज बुलिश, BUY रेटिंग बरकरार; ₹568 तक टारगेटक्या UPI, NEFT या RTGS से पैसे भेजने पर भी आ सकता है Income Tax का नोटिस?Anti Paper Leak Bill 2026: लोकसभा से पास एंटी पेपर लीक बिल, दोषियों को 10 साल की जेल और ₹50 लाख जुर्मानाCWG 2026: भारत को अब तक 2 स्वर्ण, 7 रजत पदक मिले; पदक तालिका में 9वें स्थान परITR e-Verification: रिटर्न फाइल करने के 30 दिनों के भीतर जरूर कर लें वेरिफिकेशन, जानें 5 आसान तरीकेFD Rates: सीनियर सिटीजन को मिल रहा 8.5% तक ब्याज, जानिए किस बैंक में मिल रहा सबसे ज्यादा रिटर्नविजय केडिया, मधुसूदन केला या आशीष धवन… जुलाई में किसके पोर्टफोलियो ने दिया सबसे ज्यादा रिटर्न?Indo-MIM IPO Listing: 72 गुना सब्सक्रिप्शन, अब लिस्टिंग पर कितनी होगी कमाई? GMP ने दिया बड़ा संकेत

सेबी का बड़ा फैसला: FPIs के लिए नेट सेटलमेंट की मंजूरी, कैश मार्केट में घटेगा फंडिंग दबाव

Advertisement

नियामक ने साफ किया है कि जहां फंड की देनदारियों को शुद्ध बनाया जा सकता है, वहीं एफपीआई और कस्टोडियन के बीच प्रतिभूतियों का निपटान सकल आधार पर ही जारी रहेगा

Last Updated- April 24, 2026 | 10:47 PM IST
SEBI

सेबी ने कैश मार्केट में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए फंडों के शुद्ध निपटान की अनुमति देने के अपने पहले के प्रस्ताव को लागू कर दिया है। इसके लिए उसने 31 दिसंबर, 2026 की समयसीमा तय की है। इस कदम का मकसद एफपीआई के लिए नकदी का दबाव कम करना और लेनदेन की लागत घटाना है। ये एफपीआई हाल के वर्षों में भारतीय शेयरों के बड़े बिकवाल रहे हैं।

कारोबारियों ने यह बात उठाई थी कि कस्टोडियन स्तर पर मौजूदा सकल निपटान की व्यवस्था के कारण ज्यादा फंडिंग की जरूरतें और विदेशी मुद्रा से जुड़े खर्च बढ़ जाते हैं, खासकर इंडेक्स के दोबारा संतुलन के दौरान ज्यादा ट्रेडिंग वाले समय में।

संशोधित फ्रेमवर्क के तहत एफपीआई को आउटराइट ट्रांजेक्शन के लिए नेट फंड ऑब्लिगेशन की अनुमति दी जाएगी। आउटराइट वह लेनदेन होता है जिसमें एक निपटान चक्र के भीतर किसी प्रतिभूति की केवल खरीद या केवल बिक्री शामिल होती है। चक्र के दौरान जिन सौदों में एक ही प्रतिभूति को खरीदने और बेचने के लेनदेन होते हैं, उनका निपटान सकल आधार पर ही जारी रहेगा।

नियामक ने साफ किया है कि जहां फंड की देनदारियों को शुद्ध बनाया जा सकता है, वहीं एफपीआई और कस्टोडियन के बीच प्रतिभूतियों का निपटान सकल आधार पर ही जारी रहेगा। प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) और स्टांप ड्यूटी जैसे वैधानिक शुल्क भी उतने ही रहेंगे और डिलिवरी पर लागू होंगे।

सेबी ने कहा कि जिन मामलों में सीधी खरीद, सीधी बिक्री से ज्यादा होती है, वहां एपपीआई को बची हुई रकम के साथ-साथ गैर- शुद्ध आधार वाली देनदारियों के लिए धन देना होगा। लेकिन सीधी बिक्री से मिली अतिरिक्त रकम को नॉन-आउटराइट सौदे से सृजित होने वाली खरीद देनदारियों के साथ समायोजित नहीं किया जा सकता।

Advertisement
First Published - April 24, 2026 | 10:11 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement