मेटा जैसी कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती कंटेंट हटाने के लिए घटाई गई तीन घंटे की टाइमलाइन को लागू करते समय असली कंटेंट और खातों के साथ-साथ ऐसे कंटेंट की संभावना है जिसे कोर्ट के आदेश या किसी सरकारी अधिकारी के आदेश पर हटाने के लिए कहा गया हो। मेटा में पॉलिसी के उपाध्यक्ष एवं उप मुख्य निजता अधिकारी रॉब शर्मन ने यह बात कही।
शर्मन ने मौजूदा एआई इम्पैक्ट समिट के मौके पर एक मीडिया राउंडटेबल में कहा, ‘जब भी हमें सरकार से किसी कंटेंट की जांच करने का अनुरोध मिलेगा, हम खुद उसकी जांच करेंगे और उसे वैलिडेट करेंगे। इसमें बस समय लगता है। अक्सर तीन घंटे में काम पूरा करना मुमकिन नहीं होता।’
पिछले सप्ताह, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इन्फॉर्मेशन टेकनॉलजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियमों में बदलावों को नोटिफाई किया, जिसके तहत यह जरूरी किया गया कि सोशल मीडिया और इंटरनेट इंटरमीडियरीज को अब संदिग्ध कंटेंट को तीन घंटे के अंदर हटाना होगा, जबकि अभी तक यह समय 36 घंटे था। नए नियम शुक्रवार से लागू हो गए हैं।
हालांकि सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज के अधिकारियों और कानूनी जानकारों ने कहा कि नए बदलावों को अधिसूचित करने से पहले सरकार ने कोई औपचारिक सलाह-मशविरा नहीं किया था, लेकिन तब वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने कहा था कि नए बदलाव हितधारकों के फीडबैक के बाद किए गए थे। हितधारकों ने कहा था कि संवेदनशील कंटेंट का प्रचार रोकने के लिए 36 घंटे की टाइमलाइन बहुत ज्यादा है।
शर्मन ने कहा कि कंपनी सरकार के साथ लगातार बातचीत कर रही है और उन चुनौतियों को बताने की कोशिश कर रही है जिनका सामना कंपनियों को करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मेटा के पास डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के नियमों और गाइडलाइंस का पालन करने के लिए एक ‘काफी मैच्योर प्रोग्राम’ है।
शर्मन ने कहा, ‘आमतौर पर, जब नए प्राइवेसी नियम अपनाए जाते हैं, तो टाइमलाइन लगभग दो साल की होती है। भारत सरकार ने टाइमलाइन को काफी कम कर दिया है। हम अभी भी यह देखने की प्रक्रिया में हैं कि इसका क्या मतलब होगा।’
पिछले साल नवंबर में अधिसूचित किए गए डीपीडीपी नियमों ने भारत के पहले बड़े डिजिटल प्राइवेसी कानून को लागू किया, जिस पर एक दशक से ज्यादा समय से अलग-अलग रूपों में चर्चा चल रही थी। नवंबर में, केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि सरकार डीपीडीपी ऐक्ट के तहत अनुपालन समय-सीमा 18 महीने से घटाकर 12 महीने करने के लिए उद्योग हितधारकों के साथ बातचीत कर रही है।