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एनवीडिया और एलऐंडटी की साझेदारी, भारत में सॉवरिन गीगावॉट स्तर की एआई फैक्टरी बनेगी

एनवीडिया के संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी जेन्सन हुआंग ने बयान में कहा कि यह साझेदारी विश्व स्तरीय एआई बुनियादी ढांचे की नींव रखेगी जिससे भारत के विकास को ताकत मिलेगी।

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बीएस संवाददाता   
Last Updated- February 19, 2026 | 9:08 AM IST

इंजीनियरिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) ने सॉवरिन, गीगावॉट स्तर की एआई फैक्टरी का बुनियादी ढांचा निर्मित करने के लिए एनवीडिया के साथ प्रस्तावित उद्यम का आज ऐलान किया। इससे वैश्विक एआई पावरहाउस के रूप में भारत मजबूत होगा। एआई इम्पैक्टर समिट में इस साझेदारी की घोषणा की गई। इसका मकसद भारत के वे उद्यम, नीति निर्माता, उद्योग के प्रमुख, वैश्विक खरीदार और विश्लेषक हैं जो देश के डिजिटल और औद्योगिक बदलाव में उत्पादन श्रेणी की एआई क्षमता चाहते हैं।

यह उद्यम चेन्नई में उसके 300 एकड़ वाले गीगावॉट स्तर के परिसर में 30 मेगावॉट क्षमता तक और मुंबई में निर्माणाधीन नए 40 मेगावॉट के डेटा केंद्र में एनवीडिया जीपीयू क्लस्टर की तैनाती बढ़ाएगा।

इससे एलऐंडटी का इंजीनियरिंग, बुनियादी ढांचागत विकास और क्रियान्वयन एनवीडिया एआई के बुनियादी ढांचे के साथ जुड़ेगा। इसमें एनवीडिया जीपीयू, सीपीयू, नेटवर्किंग, प्रमुख सेवा प्रदाताओं से एनवीडिया के तीव्र स्टोरेज प्लेटफॉर्म, एनवीडिया एआई एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर स्टैक और तीव्र, सुरक्षित एआई अपनाने को सक्षम करने के लिए रेफरेंस आर्किटेक्चर शामिल हैं। हालांकि एलऐंडटी इसमें कुल कितना निवेश कर रही है, यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ। लेकिन उद्यम के सूत्रों के अनुसार 250 मेगावॉट के डेटा सेंटर की लागत लगभग 9 से 10 अरब डॉलर होती है।

एनवीडिया के संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी जेन्सन हुआंग ने बयान में कहा कि यह साझेदारी विश्व स्तरीय एआई बुनियादी ढांचे की नींव रखेगी जिससे भारत के विकास को ताकत मिलेगी और इंडिया एआई के समूचे दृष्टिकोण को साकार करना संभव होगा।

उन्होंने कहा, ‘एआई मानव इतिहास में सबसे बड़े बुनियादी ढांचे को विकसित कर रही है। हर कोई इसका उपयोग करेगा। हर कंपनी इससे संचालित होगी। हर देश इसका निर्माण करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने विकासशील देशों में सभी को एआई सुलभ कराने और भारत को डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए साहसिक विजन तैयार किया है।’

इंडिया एआई मिशन के साथ तालमेल बिठाते हुए यह उद्यम सॉवरिन एआई बुनियाद ढांचा बनाने में मदद करेगा, जिससे अहम डेटा, मॉडल और एआई वर्कलोड को भारत में बनाया जा सके, प्रशिक्षित और तैनात किया जा सके तथा साथ ही वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र के साथ आपस में सूचनाओं का आदान-प्रदान भी हो सके। यह सॉवरिन बाय-डिजाइन फैब्रिक देसी जरूरतों, ग्लोबल हाइपरस्केलर, क्लाउड सेवा प्रदाताओं और उन उद्यमों को सेवा प्रदान करने के लिए है, जो रणनीतिक केंद्र के तौर पर बड़े स्तर पर एआई क्षमता तैनात करने के लिए भारत का उपयोग करना चाहते हैं।

First Published : February 19, 2026 | 9:08 AM IST