सरकार ने निर्यातकों के लिए बुधवार को 4,531 करोड़ रुपये की छह वर्षीय बाजार पहुंच समर्थन (एमएएस) हस्तक्षेप योजना शुरू की। यह योजना ‘ढांचागत और परिणाम उन्मुख’ हस्तक्षेप कर निर्यातकों के लिए वैश्विक पहुंच, उपस्थिति दर्ज कराने और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद करेगी।
इस योजना का ध्येय पहली बार निर्यात करने वाले और प्राथमिकता क्षेत्रों की इकाई के निर्यातकों को लाभान्वित करना है। इसके तहत प्राथमिकता क्षेत्रों में कृषि, चमड़ा, हथकरघा, खिलौने, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के निर्यातक आते हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नवंबर में 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात संवर्द्धन मिशन को मंजूरी दी थी और इस मिशन के अंतर्गत एमएएस को शुरू किया गया है।
भारत के कई उत्पादों के निर्यात पर अमेरिका के 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बाद एमएएस योजना शुरू की गई है। अमेरिका के शुल्क लगाए जाने के कारण भारत के निर्यात को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस मामले में वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव व डीजीएफटी अजय भादू ने संवाददाताओँ को बताया कि इस योजना का मुख्य तौर पर ध्येय निर्यातकों की लंबी अवधि से जारी अक्षमता या चुनौतियों को दूर करना है। इसे अमेरिकी शुल्क लगाए जाने के उपाय के रूप में नहीं देखा जाए। मौजूदा वित्त वर्ष के लिए इस योजना को 500 करोड़ रुपये आबंटित किए गए हैं। शुरुआत में 330 करोड़ रुपये के बकाए का शीघ्र निपटान किया जाएगा।
भादू ने बताया कि यह योजना केवल निर्यात उत्पादों और मार्केट के विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित करता है बल्कि लाभार्थियों के विविधीकरण पर भी ध्यान केंद्रित करता है।