अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी द्वारा मंगलवार को जारी ‘भारत में कामकाज की स्थिति-2026’ रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2023 में 20 से 29 साल की उम्र के दो तिहाई से अधिक बेरोजगार भारतीय स्नातक थे। रिपोर्ट के मुताबिक बेरोजगारों में डिग्री धारकों का हिस्सा 2017 के 46 प्रतिशत से तेजी से बढ़कर 2023 में 67 प्रतिशत हो गया।
सभी स्नातकों में से आधे से भी कम लोगों के पास रोजगार था और 48.8 प्रतिशत लोगों ने किसी न किसी तरह का काम करने की जानकारी दी। सभी स्नातकों में से केवल 6.7 प्रतिशत लोगों के पास स्थायी वेतन वाली नौकरियां थीं, जबकि 3.7 प्रतिशत लोग ‘व्हाइट-कॉलर’ नौकरियां कर रहे थे।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘2004-05 और 2023 के बीच हर साल 50 लाख स्नातक डिग्रीधारक तैयार हुए, जबकि करीब 28 लाख लोगों को ही रोजगार मिला। इसमें से भी वेतनभोगी कर्मचारियों की संख्या बहुत मामूली है। इससे ग्रेजुएट बेरोजगारों की संख्या बढ़ी है उनकी कमाई घटी है।’
पिछले एक दशक में भारत में शैक्षिक उपलब्धि में वृद्धि हुई है, जिसमें युवाओं का एक बड़ा हिस्सा उच्च स्तर की शिक्षा पूरी करके स्नातक की डिग्री के साथ श्रम बाजार में प्रवेश कर रहा है। भारत का जनांकिकीय लाभांश कमजोर पड़ रहा है और देश अपने डेमोग्राफिक डिविडेंड के अंतिम चरण के करीब पहुंच रहा है। 15 से 29 साल के लोग यानी भारत के युवा लगभग 36.7 करोड़ हैं और काम करने लायक लोगों में इनकी हिस्सेदारी एक तिहाई है।