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पुरानी बाइक-कार में भरवा रहे हैं E20 पेट्रोल? ₹10 हजार तक बढ़ सकता है मेंटेनेंस खर्च

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E20 पेट्रोल से पुरानी कार और बाइक का माइलेज घट सकता है और मेंटेनेंस खर्च ₹10,000 तक बढ़ सकता है। जानिए एक्सपर्ट की राय और सरकार का प्लान

Last Updated- June 22, 2026 | 11:16 AM IST
E20 Fuel:, Ethanol Blended Petrol

E20 Fuel: सरकार एथेनॉल मिश्रित ईंधन और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने के लिए मिशन ​मोड में नजर आ रही है। सरकार का मानना है कि आयात पर निर्भरता घटाने, किसानों की आमदनी बढ़ने और प्रदूषण कम करने के लिए एथेनॉ​ल आधारित फ्यूल अच्छा विकल्प है। दूसरी ओर, एथेनॉल फ्यूल के इस्तेमाल से कार-बाइक को होने वाले नुकसान को लेकर अलग-अलग दावे किया जा रहे हैं। विज्ञान के नजरिए से बात करें, तो पेट्रोल और एथेनॉल की घनत्व (Density) और श्यानता (Viscosity) अलग-अलग होती है।

किसी भी फ्यूल का घनत्व और श्यानता दो अहम भौतिक गुण हैं, जो इंजन की परफॉर्मेंस, ईंधन खपत और वाहन के कलपुर्जों की उम्र पर असर डालते हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड हिंदी ने ऑटोमोटिव स्किल डेवलपमेंट काउंसिल (ASDC) के चेयरपर्सन और फाडा के पूर्व अध्यक्ष विंकेश गुलाटी से बात कर एथेनॉल मिश्रित फ्यूल पर दावों और हकीकत जानने की को​शिश की।

समय के साथ बढ़ सकती हैं परेशानियां

विंकेश गुलाटी का कहना है कि E20 Fuel डालते ही आपकी गाड़ी बंद नहीं हो जाएगी और न ही कोई बड़ी खराबी तुरंत दिखाई देगी। असली असर धीरे-धीरे सामने आएगा। E20 पेट्रोल का सबसे ज्यादा असर गाड़ी के फ्यूल सिस्टम पर पड़ता है। पेट्रोल टैंक से लेकर इंजन तक ईंधन पहुंचाने वाली पूरी व्यवस्था में रबर पाइप, गैस्केट, सील, बेयरिंग और कई छोटे-बड़े पुर्जे लगे होते हैं। एथेनॉल और पेट्रोल के गुण अलग होने की वजह से इन पुर्जों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

उन्होंने बताया कि जब पुरानी गाड़ियां बनाई गई थीं, तब वाहन कंपनियों ने यह नहीं सोचा था कि भविष्य में 20 फीसदी तक एथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल होगा। इसलिए उन गाड़ियों में इस्तेमाल हुई सामग्री आज के E20 ईंधन के हिसाब से डिजाइन नहीं की गई थी।

E20 Fuel से माइलेज घटेगा, ₹10,000 तक बढ़ेगा सर्विस खर्च!

गुलाटी का कहना है कि E20 Fuel के इस्तेमाल से पुरानी गाड़ियों के माइलेज पर असर पड़ सकता है। आमतौर पर माइलेज 3 से 7 फीसदी तक घट सकता है, जबकि कुछ मामलों में यह कमी 10 फीसदी तक भी पहुंच सकती है। सिर्फ माइलेज ही नहीं, कुछ पुर्जों की उम्र भी कम हो सकती है। जिन पार्ट्स को पहले साल में एक बार बदलना पड़ता था, उन्हें अब शायद छह महीने में बदलने की जरूरत पड़ जाए। इसका असर जेब पर भी दिख सकता है।

दोपहिया वाहन मालिकों को 500 रुपये से 2,500 रुपये तक अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। चारपहिया वाहनों में यह खर्च 5,000 रुपये से 10,000 रुपये तक पहुंच सकता है। इसके अलावा पुराने फ्यूल सिस्टम में जंग लगने यानी कोरोजन की समस्या भी बढ़ सकती है। कई बार इसकी वजह से कुछ पार्ट्स बदलने की नौबत आ सकती है।

यह पढ़ें: 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग से बचेगा 1 करोड़ टन कच्चा तेल! अब आगे क्या तैयारी कर रही सरकार

सबसे बड़ी चुनौती रोडसाइड मैकेनिकों के सामने

गुलाटी का मानना है कि E20 का सबसे बड़ा असर सिर्फ गाड़ियों पर नहीं, बल्कि उन्हें ठीक करने वाले मैकेनिकों पर भी पड़ेगा। दरअसल, पुरानी गाड़ियां आमतौर पर कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर पर नहीं जातीं। उनकी मरम्मत का काम लोकल या रोडसाइड मैकेनिक ही करते हैं। लेकिन एथेनॉल मिश्रित ईंधन से जुड़ी नई तकनीकी समस्याओं को समझने और ठीक करने की ट्रेनिंग उन्हें कौन देगा, यह बड़ा सवाल है।

उन्होंने कहा कि आज भी बड़ी संख्या में मैकेनिक स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और औपचारिक ट्रेनिंग या ऑनलाइन कोर्स में ज्यादा रुचि नहीं लेते। ऐसे में स्किलिंग और जागरूकता दोनों की जरूरत बढ़ जाती है। ASDC जैसे संस्थान BS4, BS6 और E20 से जुड़े ट्रेनिंग कार्यक्रम चला रहे हैं, लेकिन अभी काफी काम किया जाना बाकी है।

गुलाटी ने कहा कि अगर तकनीशियन को सही जानकारी नहीं होगी तो वह छोटी समस्या को भी बड़ी खराबी में बदल सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 15 साल पुरानी एक दोपहिया गाड़ी की कीमत आज 10,000 से 15,000 रुपये के आसपास हो सकती है। ऐसे में अगर गलत सलाह या गलत मरम्मत की वजह से 10,000 रुपये के पार्ट्स बदलने पड़ जाएं, तो यह वाहन मालिक के लिए बड़ा झटका होगा।

उनके मुताबिक आने वाले समय में पुरानी गाड़ियों को पहले की तुलना में ज्यादा बार सर्विसिंग की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन सबसे जरूरी बात यह होगी कि मैकेनिक को पता हो कि क्या करना है और क्या नहीं करना है।

E20 और E85 को लेकर भ्रम न पालें

गुलाटी कहते हैं, आज जो नए वाहन ई20 के लिए तैयार (ई20 कम्प्लायंट) बनकर आ रहे हैं, वही बाजार में बिक रहे हैं। अगर मेरी गाड़ी ई20 कम्प्लायंट है, तो सामान्य रूप से ई23, ई27 या ई30 जैसे मिश्रणों से भी कोई बड़ी समस्या नहीं आएगी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसमें ई85 भी डाला जा सकता है। उन्होंने चेताया कि अगर ई20 कम्प्लायंट वाहन में ई85 डाल दिया जाए तो गंभीर समस्या आ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि E85 ईंधन के लिए पूरी तरह अलग तकनीक की जरूरत होती है। इसके लिए अलग फ्यूल सिस्टम, अलग इंजन डिजाइन और विशेष कंपोनेंट्स बनाए जाते हैं। अगर किसी E20 कम्प्लायंट वाहन में E85 डाल दिया जाए तो गंभीर तकनीकी खराबी आ सकती है।

E20 Fuel: एथेनॉल पर मिशन मोड में सरकार

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में यह कहा था कि एथेनॉल मिश्रित फ्यूल से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, किसानों की आय बढ़ेगी और प्रदूषण भी कम होगा। वहीं, सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित फ्यूल आयात निर्भरता घटाने के लिए गेमचेंजर होगा और भारत की ऊर्जा जरूरतों और निर्भरता की दिशा में एक बदलावा लाएगा। गडकरी ने 100 फीसदी इथेनॉल ईंधन नियमों पर हस्ताक्षर भी किए।

इसके अलावा, पिछले दिनों अलग-अलग कार्यक्रम में हरदीप सिंह पुरी और नितिन गडकरी ने भारत की पहली 100% (E100) एथेनॉल से चलने वाली मारुति सुजुकी वेगनआर (Maruti Suzuki WagonR) फ्लेक्स-फ्यूल कार और टू-व्हीलर में E20 से लेकर E85 (85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल) पर चलने वाली हीरो मोटोकार्प की Hero Splendor+ और Hero HF Deluxe लॉन्च की।

सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से देश को कई फायदे हुए हैं। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक 2014-15 से अब तक एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के कारण भारत ने 1.84 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई है। इसके अलावा 302 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात की जरूरत कम हुई है और 909 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है। सबसे बड़ी बात यह है कि किसानों को इससे 1.58 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय मिली है। पुरी का कहना है कि अगर 2026-27 में पेट्रोल से चलने वाले नए वाहनों की बिक्री में सिर्फ 1 फीसदी हिस्सेदारी भी फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की हो जाए, तो 4 करोड़ लीटर अतिरिक्त एथेनॉल की मांग पैदा होगी। इससे किसानों, डिस्टिलरी उद्योग और देश की ऊर्जा सुरक्षा तीनों को फायदा होगा।

यानी, सरकार एथेनॉल को लेकर पूरी तरह मिशन मोड में नजर आ रही है। दूसरी ओर, एक्सपर्ट साफ तौर पर मान रहे हैं कि E20 और फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का लाभ तभी पूरी तरह मिलेगा, जब वाहन मालिकों, मैकेनिकों और उद्योग जगत को इसके बारे में सही जानकारी और पर्याप्त प्रशिक्षण मिले।

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First Published - June 22, 2026 | 11:06 AM IST

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