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22 करोड़ फीचर फोन यूजर्स के लिए स्मार्टफोन अपग्रेड मुश्किल, कीमतों में और बढ़ोतरी का खतरा

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शुरुआती फीचर फोन और शुरुआती स्तर के किसी भरोसेमंद स्मार्टफोन की कीमतों के बीच का अंतर पहले से ही 4,000 रुपये से 6,000 रुपये के बीच है

Last Updated- April 03, 2026 | 11:33 PM IST
smartphone

देश के 22 करोड़ से ज्यादा फीचर फोन उपयोगकर्ता शुरुआती स्तर वाले स्मार्टफोन में अपग्रेड करना चाहते हैं। लेकिन उनकी इतना खर्च करने की क्षमता नहीं है। यह एक बड़ी चुनौती है। शुरुआती फीचर फोन और शुरुआती स्तर के किसी भरोसेमंद स्मार्टफोन की कीमतों के बीच का अंतर पहले से ही 4,000 रुपये से 6,000 रुपये के बीच है।

यह अंतर बढ़ता ही जा रहा है क्योंकि मेमरी चिप की कीमतों में इस साल भारी उछाल आने की उम्मीद है। इससे यह उनकी पहुंच से और भी दूर हो जाएगा। उद्योग के अनुमानों के अनुसार मेमरी की कीमतों में वृद्धि से प्रति फोन लागत में 6,000 रुपये से 8,000 रुपये की और बढ़ोतरी होगी।

काउंटरपॉइंट रिसर्च के निदेशक तरुण पाठक का कहना है, ‘4जी फीचर फोन से 4जी स्मार्टफोन में अपग्रेड करने का मतलब होगा प्रति फोन अतिरिक्त 4,000 रुपये का भुगतान। 5जी के मामले में यह 6,000 रुपये ज्यादा है। इस साल यह अंतर और बढ़ेगा ही क्योंकि मेमरी की कमी के कारण उनकी कीमतों में खासा इजाफा होगा। इसका एक रास्ता यह हो सकता है कि सरकार किफायती फोन को प्रोत्साहित करे।’

इस मसले को दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उठाया है। वह कहते हैं कि हैंडसेट का खर्च उठाने की क्षमता डिजिटल समावेशन का नया मोर्चा बन रही है, न कि कवरेज। उनका तर्क है कि कई बाजारों में किसी बेसिक स्मार्टफोन की लागत किसी उपयोगकर्ता की मासिक आय का 30 से 40 प्रतिशत होती है और कभी-कभी इससे भी अधिक।

सिंधिया का कहना है कि यह संख्या ‘5 प्रतिशत आय बेंचमार्क’ से बहुत ऊपर है, जिसे खर्च उठाने की क्षमता का अहम स्तर माना जाता है। वह कहते हैं कि पीएलआई (उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन) योजना को अब ‘मेक इन इंडिया’ से ‘अफोर्डेबल इन इंडिया’ की ओर बढ़ना चाहिए, ताकि अंतिम उपयोगकर्ता तक पहुंचा जा सके।

हालांकि पीएलआई मोबाइल योजना 2.0 पर काम कर रहा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय स्मार्टफोन का निर्यात बढ़ाने पर ध्यान देता दिख रहा है, साथ ही प्रोत्साहनों को मूल्य वृद्धि से जोड़ रहा है। मूल पीएलआई योजना में उसकी पिछली योजना दुनिया में स्वदेशी स्मार्टफोन का चैंपियन बनाने की भी थी, जो सफल नहीं हुई।

पाठक का कहना है कि चुनौती यह है कि 5,000 से 10,000 रुपये तक के फोन की श्रेणी वैसे भी सिकुड़ रही है। उन्होंने कहा, ‘यह श्रेणी घट रही है क्योंकि इस श्रेणी में विकल्प कम हैं। 71 प्रतिशत तक 5जी फोन हैं और ऐसे बहुत कम फोन उपलब्ध हैं। मूल उपकरण विनिर्माताओं (ओईएम) के लिए इस श्रेणी में लाभ कमाना मुश्किल है।

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First Published - April 3, 2026 | 11:30 PM IST

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