देश में प्रौद्योगिकी प्रतिभा में शुरुआती करियर वाले लोगों में से लगभग 90 प्रतिशत या तो आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) में नेटिव (पहले से ही एआई अपनाने वाले) हैं या दक्ष हैं। नैस्कॉम की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इसके अनुसार यह बात एंटरप्राइज एआई अपनाने में अहम घटक को उजागर करती है, भले ही पिछले कुछ वर्षों में यह उम्मीदों से पिछड़ गई हो।
यह अध्ययन 11 पैमानों पर एआई नेटिव क्षमताओं का आकलन करता है। इनमें एआई पर निर्भरता, कुशलता, तालमेल बिठाना, सृजन, निर्णय लेना, सोचने-समझने की आजादी, तकनीकी जानकारी, सीखना, बुनियादी क्षमता, एआई युक्त उत्पादकता और एआई का जिम्मेदारी से इस्तेमाल शामिल हैं। इसमें कंप्यूटर साइंस और उससे जुड़े विषयों के इंजीनियरिंग के आखिरी साल के छात्र और तीन साल तक के अनुभव वाले तकनीकी पेशेवर शामिल हैं।
यह सूचकांक कुल मिलाकर 62 के स्कोर के साथ यह समझने के लिए आधार रेखा स्थापित करता है कि भारत का भविष्य का प्रौद्योगिकी कार्यबल एआई-प्रथम वाली दुनिया को कैसे अपना रहा है और आने वाले वर्षों में इसके विकास पर नजर रख सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इस कुल स्कोर से पता चलता है कि एआई-नेटिव क्षमता विभिन्न आयामों में असमान है। प्रौद्योगिकी क्षेत्र की भारत की शुरुआती प्रतिभा एआई के निर्णय, मूलभूत क्षमता और एआई के जिम्मेदार उपयोग में सापेक्षिक ताकत प्रदर्शित करती है, जबकि एआई व्यवस्था और तकनीकी आधार में क्षमता का खासा अंतर उभरता है। ये निष्कर्ष बताते हैं कि हालांकि एआई अपनाने का व्यापक रूप से प्रसार हुआ है, लेकिन गहरी इंजीनियरिंग क्षमता का निर्माण अगला कदम है।’
इस क्षमता के भीतर एआई दक्षता 68 प्रतिशत स्तर के साथ सबसे आगे थी और उसके बाद एआई-नेटिव 23 प्रतिशत के स्तर पर थी। इससे पता चलता है कि अगली चुनौती अब एआई को अपनाना नहीं, बल्कि बेहतर इंजीनियरिंग समझ, तालमेल और तकनीकी गहराई के जरिये एआई-दक्षता से एआई-नेटिव होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना है।