वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को देश में उच्च गुणवत्ता वाले मेडिकल डिवाइस विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार मेडिकल डिवाइस के परीक्षण के लिए जरूरी उपकरण खरीदने का 100 फीसदी खर्च उठाने को तैयार है।
फार्मा उद्योग के दो कार्यक्रमों में गोयल ने घरेलू कंपनियों से तकनीकी साझेदारी और संयुक्त उद्यम बढ़ाने की अपील की। उन्होंने बड़ी विदेशी दवा कंपनियों और नई तकनीक वाली कंपनियों को भारत आने के लिए आमंत्रित करने को भी कहा।
गोयल ने कहा कि भारत को मेडिकल डिवाइस के लिए घरेलू स्तर पर जरूरी कलपुर्जों और तकनीक का मजबूत आधार तैयार करना होगा। इसके लिए साझा परीक्षण सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए, जहां उपकरणों की जांच अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर हो सके।
उन्होंने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के जरिए सरकार कंपनियों के लिए सर्वोत्तम परीक्षण उपकरणों की खरीद की 100 फीसदी लागत उठाने को तैयार है। उन्होंने उद्योग से ऐसी सुविधाओं की मांग सरकार के सामने रखने को कहा। सरकार आधुनिक परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करेगी।
गोयल ने कंपनियों से तकनीकी साझेदारी, संयुक्त उद्यम और संयुक्त अनुसंधान एवं विकास केंद्र स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार कंपनियों को लाइसेंसिंग, सह-विकास और सह-डिजाइन जैसे विकल्पों पर भी काम करना चाहिए।
उन्होंने डिजाइन, कॉपीराइट, पेटेंट कानून और बौद्धिक संपदा अधिकार व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, भारत के पास लागत के मामले में फायदा है और इसे वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
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गोयल ने बीमा कंपनियों और हेल्थ-टेक कंपनियों से ऐसे उत्पाद और प्लेटफॉर्म विकसित करने को कहा, जिससे मरीजों को इलाज की पूरी प्रक्रिया में आसानी हो और बीमा दावों का भुगतान समय पर हो।
उन्होंने अस्पतालों से इलाज के पैकेज की कीमतों और सेवाओं की जानकारी पारदर्शी तरीके से देने तथा मरीजों के साथ नैतिक व्यवहार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक गलत कदम से भारत की साख, कारोबार और भरोसे को नुकसान पहुंच सकता है।
गोयल ने बताया कि पिछले सात वर्षों में भारत के मेडिकल वैल्यू टूरिज्म से 35 लाख मरीजों को लाभ मिला है। अब भारत का लक्ष्य हर साल 1 करोड़ विदेशी मरीजों को आकर्षित करने का होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत के पास इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी डॉक्टर, तकनीक और स्वास्थ्य सेवा का आधार मौजूद है। विदेशी मरीजों के लिए अलग-अलग भाषाओं के दुभाषियों का नेटवर्क तैयार करने और विदेशों में अस्पतालों के साथ साझेदारी बढ़ाने की भी जरूरत है।
गोयल ने कहा कि भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौतों और कारोबारी चर्चाओं में शामिल देश भारत से उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं, डॉक्टर, तकनीशियन, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी बड़ी संख्या में चाहते हैं।