facebookmetapixel
Advertisement
1991 के आर्थिक सुधार अचानक नहीं आए थे, 1970 के दशक में ही बन गई थी बदलाव की जमीन: नितिन देसाईभारत के चॉकलेट बाजार से तेज बढ़ने की तैयारी में फेरेरो रोशे, प्रीमियम सेगमेंट पर नजरRBI गवर्नर की फिनटेक कंपनियों को नसीहत, ‘ग्राहकों के आंकड़ों को व्यावसायिक संपत्ति नहीं, जिम्मेदारी मानें’PNB का वेल्थ मैनेजमेंट और क्रेडिट कार्ड पर बड़ा दांव, 2027 में नई सेवाएं शुरू करने की तैयारीFCNR(B) फंड के इस्तेमाल में लगेंगे 3-4 महीने, असामान्य कर्ज बढ़ने का खतरा नहीं: SBI चेयरमैनक्लोजिंग ऑक्शन में शुरुआती लिक्विडिटी की समस्या सामान्य, SEBI चेयरमैन बोले: दुनिया भर के बाजारों में हुआ ऐसाअगले दौर के सुधारों में डिरेगुलेशन पर जोर, छोटी-छोटी अड़चनें दूर करने की जरूरत: गौबाHDFC बैंक के पक्ष में बहरीन अदालत का फैसला, निवेशकों के सभी 7 मामले खारिजगारंटीशुदा रिटर्न वाली पेंशन योजना की तैयारी, PFRDA ने विशेषज्ञ समिति का किया गठनभारत-रूस व्यापार को 60 से 100 अरब डॉलर तक ले जाने की तैयारी, व्यापार संतुलन पर जोर

क्लोजिंग ऑक्शन में शुरुआती लिक्विडिटी की समस्या सामान्य, SEBI चेयरमैन बोले: दुनिया भर के बाजारों में हुआ ऐसा

Advertisement

सेबी चेयरमैन ने कहा कि सीएएस में शुरुआती लिक्विडिटी समस्या स्वाभाविक है और इसके सेटलमेंट प्राइस में बदलाव के लिए जल्द परामर्श पत्र जारी किया जाएगा

Last Updated- September 10, 2026 | 11:12 PM IST
Tuhin Kanta Pandey, Chairman, SEBI
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने आज कहा कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) के लागू होने के शुरुआती चरणों में सभी देशों ने कम तरलता (लि​क्विडिटी) का सामना किया है। भारत ने सीएएस ढांचे को 3 अगस्त से अपनाया है।

ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) को संबोधित करते हुए सेबी के चेयरमैन ने दोहराया कि बाजार नियामक जल्द ही इस ढांचे में प्रस्तावित बदलावों पर एक परामर्श पत्र जारी करने जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीएएस एक ढांचे के तौर पर बरकरार रहेगा।

पांडेय ने कहा, ‘हमारे कई प्रतिभागियों ने सीएएस को लागू किए जाने की सराहना की है। उन्होंने कहा कि एमएससीआई पुनर्संतुलन और अन्य चीजें काफी अच्छी तरह से हुईं। तकनीकी रूप से सबकुछ अच्छे तरीके से चला। अब बाजार का एक हिस्सा इससे प्रभावित होता है क्योंकि हमने निपटान मूल्य को पूरी तरह से निर्भर रखा था।’ 

पिछले सप्ताह बाजार नियामक ने घोषणा की थी कि वह प्रतिक्रिया मिलने के बाद डेरिवेटिव अनुबंधों के निपटान मूल्य को निर्धारित करने के लिए उपयोग की जाने वाली पद्धति में बदलाव पर जल्द ही एक परामर्श पत्र जारी करेगा। प्रस्ताव इस सप्ताह आने की उम्मीद है।

चेयरमैन ने कहा, ‘सीएएस ढांचा बरकरार रहेगा… सवाल सिर्फ तरलता का है। कई बाजार प्रतिभागियों ने हमें अमेरिका, जापान, हॉन्ग कॉन्ग सहित तमाम देशों में इसे लागू किए जाने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि शुरू में हर जगह जब सीएएस लाया गया था तो तरलता हमेशा एक मुद्दा थी और यह समय के साथ बढ़ती है। मगर सवाल यह है कि क्या हम इंतजार कर सकते हैं या क्या हमारे पास इसका कुछ अस्थायी समाधान हो सकता है।’ 

हॉन्ग कॉन्ग ने 2008 में क्लोजिंग ऑक्शन लॉन्च किया था लेकिन 2009 में बंद भाव में काफी उतार-चढ़ाव के बाद उसे वापस ले लिया गया। हालांकि उसने 2016 में मूल्य दायरा एवं अन्य बदलावों के साथ उसे दोबारा शुरू कर दिया।

कई ब्रोकरेज फर्मों को उम्मीद है कि नीलामी मूल्य बैंड और भी सख्त हो जाएंगे, डेरिवेटिव सत्र के साथ विस्तारित या ओवरलैप हो जाएंगे, या वॉल्यूम-वेटेड औसत मूल्य पर इंडेक्स डेरिवेटिव का निपटान किया जाएगा।

पांडेय ने बाजार नियामक द्वारा निगरानी और सुरक्षा उपायों में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग के बारे में बताया।

उन्होंने कहा, ‘एआई नियामकों की मदद कर सकती है। हम कुछ एआई टूल्स का उपयोग कर रहे हैं। वे हमें जोखिमों को पहले पहचानने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इससे नियामक फ़ैसले लेने में मदद मिलनी चाहिए, न कि उनकी जगह लेनी चाहिए। ऐसा न हो कि वह एआई के निर्णय को ही बदल दे। हम एआई के साथ आवधिक निगरानी से सक्रिय निगरानी की ओर बढ़ सकते हैं। ऑन-साइट के बजाय ऑफ-साइट और आवधिक के बजाय लगभग वास्तविक समय निगरानी हो सकती है।’ 

चेयरमैन ने सेबी द्वारा सुदर्शन, आर (एआई) डीएआर और साइबर सुरक्षा ऑडिट अनुपालन पोर्टल (सी-एसएसी) जैसी पहलों और साधनों का विवरण दिया जो नियामक को सोशल मीडिया, मध्यस्थ विज्ञापन की निगरानी, साइबर सुरक्षा नियंत्रण का विश्लेषण करने में मदद कर रहे हैं।

सेबी चेयरमैन ने कहा, ‘निगरानी सक्षम, सशक्त और जवाबदेह होना चाहिए। फिर मुझे लगता है कि सुरक्षा उपाय मॉडल के आसपास होने चाहिए। एजेंटिक एआई के लिए भी इस बात पर कड़ी सीमाएं चाहिए कि वह क्या कर सकता है।’

Advertisement
First Published - September 10, 2026 | 11:12 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement