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SEBI ने लॉन्च किया डीमैट 2.0, अब डिजिटल टोकन के रूप में मिलेंगे कॉरपोरेट बॉन्ड

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SEBI ने डीमैट 2.0 का पायलट शुरू किया है, जिसमें कॉरपोरेट बॉन्ड डिजिटल टोकन बनेंगे और डिजिटल रुपये से तुरंत सेटलमेंट की सुविधा मिलेगी

Last Updated- September 10, 2026 | 10:11 PM IST
Sebi
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

बाजार नियामक सेबी ने गुरुवार को डीमैट 2.0 लॉन्च किया। यह डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नॉलजी (डीएलटी) का इस्तेमाल करके कॉरपोरेट बॉन्ड के टोकनाइजेशन के लिए पायलट परियोजना है। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​और सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने मिलकर इस पहल को शुरू किया। इसके जरिये कॉरपोरेट बॉन्ड जारी करने, रखने, ट्रेड करने और निपटान करने के नए तरीके का परीक्षण किया जाएगा।

इस प्रायोगिक परियोजना के तहत अब तक तीन कंपनियों ने कुल मिलाकर 1,025 करोड़ रुपये के टोकनाइज्ड बॉन्ड जारी किए हैं। 7 सितंबर को आरईसी ने सबसे पहले 18 निवेशकों से 500 करोड़ रुपये जुटाए, 9 सितंबर को एलऐंडटी ने चार निवेशकों से 500 करोड़ रुपये जुटाए और आईआईएफएल ने 25 करोड़ रुपये जुटाए।

इसके तहत, कॉरपोरेट बॉन्ड को डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर पर डिजिटल टोकन के तौर पर बनाया जाता है। यह एक साझा किए जाने वाला इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड होता है, जिसे डीएलटी का इस्तेमाल करके मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर संस्थान मेंटेन करते हैं। इस लेजर का मालिकाना हक डिपॉजिटरी के पास होता है। 

सेबी ने कहा, कानून की नजर में बॉन्ड वैसा ही है, जैसा वह था। कंपनी की भुगतान करने की ज़िम्मेदारी में कोई बदलाव नहीं हुआ है और निवेशकों के अधिकार भी वही हैं। क्रेडिट रेटिंग, डिबेंचर ट्रस्टी, लिस्टिंग और डिस्क्लोजर से जुड़ी जरूरतें पूरी तरह लागू रहेंगी। साथ ही, सेबी ने यह भी कहा कि इससे मार्केट बंटेगा नहीं। यह सिस्टम यूनिफाइड मार्केट इंटरफेस (यूएमआई) के जरिए आरबीआई की होलसेल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) यानी डिजिटल रुपये से जुड़ा है। इससे एटॉमिक सेटलमेंट होंगे, जिसमें बॉन्ड और पैसे का लेनदेन तुरंत हो जाता है।

सेबी ने कहा कि इस तकनीक से कॉरपोरेट बॉन्ड जारी करने, सेटलमेंट और सर्विसिंग की प्रक्रिया तेज और ज्यादा कुशल हो जाएगी। त्रुटियां भी कम होंगी। स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिये ब्याज का भुगतान और रीडम्पशन भी अपने-आप हो सकता है। 

सेबी चेयरमैन ने कहा, पायलट के लिए कॉरपोरेट बॉन्ड सबसे अच्छा तरीका है क्योंकि इसमें कुछ इंस्टिट्यूशनल प्रतिभागी शामिल होते हैं। इसमें स्थिरता होती है और इसमें बहुत ज्यादा ट्रेडिंग नहीं होती। ट्रेडिंग की फ़्रीक्वेंसी कम होती है। अगला चरण सेकंडरी बाजार में ट्रेडिंग शुरू करना है। इसका मतलब है कि आपके पास बॉन्ड हैं और आप उसे रखे हुए हैं। मान लीजिए आप उसे हस्तांतरित करना चाहते हैं। हमने हस्तांतरित करने के लिए एक तरीका बनाया है। यह अभी परीक्षण की प्रक्रिया में है।

इस प्रायोगिक परियोजना को चरणों में लागू किया जा रहा है। पहले चरण में अभी जारी हो रहे बॉन्ड शामिल हैं। बाद के चरणों में मौजूदा रिक्वेस्ट-फॉर-कोट (आरएफक्यू) प्लेटफॉर्म के जरिये  बॉन्ड की खरीद-बिक्री और खुदरा निवेशकों की पहुंच को शामिल किया जाएगा। निवेशकों के लिए ये बॉन्ड उनके मौजूदा डीमैट खाते में रखे जाएंगे। इसके लिए किसी अलग खाते या नए केवाईसी की जरूरत नहीं होगी।

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First Published - September 10, 2026 | 10:11 PM IST

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